देश में अब सभी को मिलेंगी मुफ्त में दवाएं

केंद्र सरकार की नई पॉलिसी के तहत जिला अस्पतालों समेत गांवों में सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों को मुफ्त में जेनेरिक दवाएं दी जाएंगी। अगर कोई डॉक्टर ब्रांडेड दवाएं लिखता है तो उसके लिए सजा का प्रावधान भी है। हालांकि सजा कितनी होगी इस पर अभी फैसला नहीं लिया गया है। लेकिन उम्मीद है यह छङ महीने होगी। सरकारी डॉक्टरों को जेनेरिक दवाओं की लिस्ट मुहैया कराएगी। इस लिस्ट में अगर रोग की दवा है तो मरीज को जेनेरिक दवा ही लिखनी होगी। अगर कोई ऐसी दवा है, जिसका जेनेरिक उत्पाद मौजूद नहीं है तभी ब्रांडेड दवाएं लिखी जाएंगी।
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पास्ट नेशनल प्रेसिडेंट डा. विनय अग्रवाल कहते हैं सरकारी अस्पतालों में ही जेनेरिक दवाएं मिलने लगे तो महंगे इलाज की आधी दिक्कत दूर हो जाएगी। दिल्ली में दवाओं का कारोबार दो हजार करोड़ रुपये का है वहीं जेनेरिक दवाओं की बिक्री का प्रति बमुश्किल दो फीसदी ही है। जाहिर सी बात है जेनेरिक दवाओं के स्टोर खुले तो मरीजों की जेब नहीं ढीली होगी।
आपकी जानकारी के लिए बता दें हर ब्रांडेड दवा कंपनी जेनेरिक दवाओं का निर्माण करती है मगर कंपनी सिर्फ अपने मूल उत्पाद की मार्केटिंग करती है। नतीजा लोगों तक जेनेरिक दवा की जानकारी तक नहीं होती। यहां बता दें जेनेरिक दवाएं सॉल्ट के नाम से बिकती हैं। जबकि ब्रांडेड दवाएं कंपनी के नाम से। ब्रांडेड दवाओं की कीमत मार्केटिंग की लागत के साथ बढ़ जाती है। नतीजा जो जेनेरिक दवा 20 पैसे की होती है, उसी सॉल्ट की ब्रांडेड बीस रुपये तक की मिलती है।












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