बच्चों के गले व नाक में फंसा सिक्का, मूंगा व सेल

सीतापुर निवासी आशीष अवस्थी 2 वर्ष ने दस दिन पहले माला का मूंगा नाक में डाल लिया था। चिकित्सकों के अनुसार मूंगा नाक के काफी अंदर चला जाने की वजह से नहीं निकल पा रहा था।
डा. श्रीवास्तव ने उसकी जांच कर देखा कि मूंगा काफी भीतर और उन्होंने नाक का एक जटिल ऑपरेशन करके मूंगा को बाहर निकाला। डा. श्रीवास्तव के सामने एक और मामला आया जिसमें बच्चे ने दो माह पूर्व सिक्का निगल लिया था जिस वजह से उसे काफी तकलीफ हो रही थी। जिला बलरामपुर निवासी लवकुश 4 वर्ष दो माह पहले सिक्का निगल लिया था। सिक्का गले में जाकर फंस गया था। सिक्का फंसा होने के कारण बच्चा आसानी से भोजन नहीं कर पा रहा था।
एक्सरे रिपोर्ट में गले में सिक्का फंसा होने की बात सामने आई। अस्पताल में डॉक्टर ने बेहोशी देकर इंडोस्कोपी विधि से गले में फंसे सिक्के को निकाल दिया। उधर जानकीपुरम निवासी शिवम मिश्रा 13 वर्ष से तीन साल पहले बबूल का बीज कान में डाल लिया था। बबूल का बीज तीन साल तक पड़ा होने की वजह से कान में घांव बन गया था।
डॉक्टरों ने जांच की तो पता चला कि कान में बीज पड़ा हुआ था। अस्पताल के ईएनटी विशेषज्ञ डॉ.एससी श्रीवास्तव का कहना है कि तीनों बच्चों को बेहोशी देने के बाद ऑपरेशन किया गया। उनका कहना है कि अगर मांबाप जागरूक हो जाए तो ऐसी स्थिति न आने पाए। उनका कहना है कि बच्चों का यह सामान निगले काफी समय हो गया था और माता पिता को इसकी जानकारी ही नहीं हुई थी जिस कारण समस्या बढ़ गयी थी।












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