अब उठेगा डार्क एनर्जी से परदा

सर्न में चल रहे प्रयोग का अगला पड़ाव डार्क एनर्जी है। यह वो एनर्जी है जिसके कारण आकाशगंगाए तेजी से यूनिवर्स में भाग रही है। लेकिन इसके लिए उन्हें ऊर्जा कहां से मिलती है, यह रहस्य बना हुआ है । इस रहस्यमय एनर्जी को डार्क मैटर नाम दिया गया है। इस प्रयोग की सफलता से डार्क एनर्जी व डार्क मैटर के बारे में भी बता चलेगा। इसके साथ ही एक्सट्रा डायमेंशन की खोज हो सकती है। इस प्रयोग से जुड़ने और दुनिया भर के वैज्ञानिकों के साथ काम करने से काफी अनुभव प्राप्त हुआ।
हालांकि कुछ वैज्ञानिक अभी भी गा़ड पार्टिकल से पूरी तरह सहमत नहीं है। जिनेवा के महाप्रयोग में सालों से लगे वैज्ञानिक अब इस नतीजे पर पहुंचे हैं कि हिग्स बोसोन ही वैक्यूम में दिखाई देता है और यही यूनिवर्स की संरचना के लिए जरूरी कण है। इस कण को ही गॉड पार्टिकल मान सकते हैं। लेकिन वैज्ञानिकों ने दावे से यह नहीं कहा है कि हिग्स बोसोन ही गॉड पार्टिकल है। इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि यूनिवर्संस की रचना के रहस्यों से पर्दा पूरी तरह से उठा गया है।
यहां बता दें 1964 में ब्रिटिश भौतिकविद पीटर हिग्स ने पहली बार यह परिकल्पना दी थी कि गॉड पार्टिकल या हिग्स बोसोन ही वह कण हैं जिनकी यूनिवर्स की उत्पत्ति में महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। अगर यह नहीं होता तो कुछ भी नहीं होता। न हम होते न तारे होते न धरती होतीभौतिक के नियमों के अनुसार यही वह कण हैं जो यूनिवर्स की हर संरचना को भार (मास) देते हैं। वैज्ञानिक हिग्स ने पहली बार यह संरचना दी थी इसीलिए इन कणों को हिग्स बोसोन का नाम दिया गया था।
40 वर्ष पूर्व वैज्ञानिक हिग्स ने कह दिया था कि ऐसा पार्टिकल होना चाहिए। 28 साल की मेहनत के बाद आज यह साबित हो गया है कि गॉड पार्टिकल जैसा कुछ है। यह सर्न की बड़ी कामयाबी है। आने वाले समय में यह खोज विज्ञान के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा। अब वैज्ञानिकों को पूरा भरोसा है कि आनेवाले समय में आकाशगंगाओं को गति देनेवाली डार्क एनर्जी के बारे में भी पता चल जाएगा।












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