कुछ भी कर लो, मुंबई पर जरूर कहर बरपायेगा समुद्र

Rising sea level threatens coastal areas
दिल्ली (ब्यूरो)। वैज्ञानिकों ने कहा है कि ग्लोबल वार्मिंग में कमी के बावजूद समुद्र तल का बढ़ना जारी है। उनका कहना है कि अगर धरती का तापमान कम भी कर लिया गया तो भी समुद्र तल का बढ़ना जारी रहेगा। इससे लगभग दस फीसदी आबादी पर संकट आने वाला है। इसमें सबसे बढ़ा खतरा मालद्वीव पर है। इस देश का वजूद खत्म होना लगभग तय माना जा रहा है। कोलकाता और मुंबई को बचा पाना भी संभव नहीं दिख रहा है। यह सब इसी सदी में होने जा रहा है।

2100 तक वॉर्मिंग की वजह से समुद्र का लेवल करीब 1.4 मीटर बढ़ जाएगा, जो कि पहले के अनुमान से दोगुना है। साइंटिफिक कमिटी ऑन ऐंटार्कटिक रिसर्च की मानें तो हिंदमहासागर में स्थित द्वीप देश मालदीव और प्रशांत महासागर में स्थित तुवालू द्वीप तो पूरी तरह डूब जाएंगे। भारत में मुंबई ही नहीं, कोलकाता और बांग्लादेश में ढाका के तटीय इलाकों में भारी तबाही होगी।

लंदन, न्यूयॉर्क और शंघाई को समुद्र के कहर से बचाने के लिए करोड़ो डालर खर्च करने पड़ेंगे। दुनिया का तापमान दो डिग्री सेल्सियस बढ़ा तो भी समुद्र का जलस्तर 50 सेंटीमीटर बढ़ जाएगा। पहले के अनुमान से यह दोगुना है। तुवालू ही नहीं मालद्वीव, लक्षद्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीपसमूह, पश्चिम बंगाल में सुन्दरवन और केरल में कुट्टानाड भी समुद्र तल के ऊपर होने से डूबेंगे। ग्लेशियरों के पिघलने से सदानीरा नदियाँ सूख जायेंगी, जंगल सूखेंगे।

मेलबोर्न की संस्था साइंटिफिक कमिटी ऑन ऐंटार्कटिक रिसर्च के वैज्ञानिकों ने कहा है कि हजारों साल तक अभी समुद्र तल का बढ़ना जारी रहेगा। जाहिर है प्रकृति के अपने नियम है उसके कहर से हम नहीं बच पाएंगे। वैज्ञानिकों के मुताबिक अगर समुद्र तल का तापमान कम हो गया तो भी समुद्रके नीचे तापमान ज्यादा रहेगा और समुद्र अपना कहर बरपाता रहेगा। क्योंकि ग्लोबल वार्मिग के कारण समुद्र के नीचे का हिस्सा गर्म हो गया है। 2005 से हर साल समुद्र 2.3 मीलीमीटर बढ़ रहा है। वे कहते है कि अगर धरती का तापमान दो डिग्री कम हो जाए तो भी फर्क नहीं पडे़गा।

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