81 घंटे बाद माही तक पहुंची बचाव टीम

माही के स्वास्थ्य के बारे में भी कोई जानकारी नहीं दी जा रही है। बोरवेल से निकाले जाने के तुरंत बाद माही को अस्पताल ले जाया गया, जहां उसका मेडिकल चेक-अप किया जायेगा। ऑपरेशन माही में सेना के जवानों को सबसे ज्यादा मशक्कत उस पत्थर को काटने में लगी, जो माही से महज 20 फुट दूरी पर था।
इस ऑपरेशन के प्रमुख लेफ्टनंट कर्नल अश्वनि त्यागी ने बताया कि यह पत्थर उस जगह पर स्थित था, जहां समानांतर सुरंग खोदी जा रही थी। यह इस प्रकार का अब तक का सबसे बड़ा ऑपरेशन था, जहां जीएमआर तकनीक से माही तक पहुंचने की दिशाओं का पता लगाया गया और सुरंग का रास्ता बनाया गया।
इस ऑपरेशन के दौरान लगात माही तक ऑक्सीजन पहुंचायी जाती रही। इस काम में सेना, अग्निशमन, पुलिस विभाग, गुड़गांव मेट्रो स्वास्थ्य और कर विभाग के 100 से ज्यादा अधिकारी-कर्मचारी लगे। यही नहीं स्थानीय लोगों ने भी बचाव दल की काफी मदद की।
गौरतलब है कि बुधवार को माही अपना चौथा जन्मदिन मनने के बाद बच्चों के साथ घर के बाहर खेल रही थी। तभी अचानक रात के करीब 11 बजे वो बोरवेल में गिर गई। घर वालों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। करीब दो घंटे के अंदर बचाव दल मौके पर पहुंचा और काम शुरू किया। इस दौरान बोरवेल में सीसीटीवी कैमरा डाला गया, जिसमें माही का हाथ दिखा था, लेकिन कोई हलचल नहीं दिखी थी।
माही के पिता ने बताया कि पुलिस करीब डेढ़ घंटे देरी से पहुंची। उससे पहले तक माही के रोने की आवाज़ें सुनाई दे रही थीं। उधर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने हरियाणा सरकार से इस लापरवाही के लिए जवाब तलब किया है।












Click it and Unblock the Notifications