देश भर के मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टर 25 को हड़ताल पर

आईएमए के अध्यक्ष डा. एएम खान का कहना है कि केन्द्र ने जो एक्ट बनाया है वह वास्तविकता से परे हैं। उन्होंने मेडिकल काउंसिल ऑफ इण्डिया के गवर्निंग बोर्ड को भंग कर पुन: एमसीआई की स्थापना किए जाने की मांग की।
आईएमए भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में डा. खान ने कहा कि क्लीनिक एक्ट के तहत सरकार ने कहा कि यदि कोई मरीज किसी निजी क्लीनिक व नर्सिंग होम पर आए तो उसे प्राथमिक उपचार देकर स्थिति संतोषजनक होने के बाद ही उसे किसी चिकित्सालय में रिफर किया जाए ऐसा न करने पर सम्बन्धित नर्सिंग होम पर कार्यवाही हो सकती है।
सरकार ने यह नियम तो बना दिया तथा प्रशासन को इसे लागू करने की हिदायत भी दे दी लेकिन आईएमए के चिकित्सकों ने इसका विरोध शुरू कर दिया। डा. खान का कहना है कि इस एक्ट के तहत चिकित्सक विवश होंगे कि वह प्रत्येक मरीज को प्राथमिक उपचार उपलब्ध ही कराएं अन्यथा उनके खिलाफ कार्यवाही होगी।
उन्होंने तर्क दिया कि यदि नर्सिंग होम में हृदय के मरीज के इलाज की सुविधा न हो और हार्ट अटैक का मरीज आ जाए तो चिकित्सक क्या करेंगा। ऐसे में यदि व मरीज को रिफर करता है तो एक्ट का उल्लंघन होगा। यदि मरीज का इलाज करता है और उसे कुछ हो जाता है तो तीमारदार उसे नहीं छोड़ेगे ऐसे में चिकित्सक दोनों ही ओर से फंस जाएगा।
डा. खान का कहना है कि एक्ट बनाने से पूर्व केन्द्र सरकार को इस नियम के सभी पहलुओं पर गौर करना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि हड़ताल के माध्यम से वह नियम का विरोध करेंगे तथा सरकार से मांग करेंगे कि एक्ट में संशोधन किया जाए। डा. खान ने कहा कि एमसीआई के भंग होने के कारण भी चिकित्सकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा क्योंकि जो बोर्ड बनाया गया उसमें सरकारी लोग हैं जो उचित ढंग से कार्य नहीं करते हैं।












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