सिक्किम के रूमटेक में देखिये काई से बना बगीचा

पॉम्पे जनवरी 2011 में सिक्किम आए और यहां के वन, पर्यावरण एवं वन्यजीव प्रबंधन को उन्होंने अपने स्वैच्छिक सेवाएं दीं। करीब 40 वर्ग मीटर क्षेत्रफल में पत्थरों पर बनाए गए इस बगीचे में मानव निर्मित कोई भी सामग्री नहीं है और रास्ते बनाने के लिए पत्थरों का उपयोग किया गया है।हरे भरे इस बगीचे में लगे ब्रायोप्साइडा और लाइकोपोडियोप्साइडा एसपीपी जैसी मॉस की प्रजातियों का संग्रह या खुद बगीचे से ही और आसपास से किया गया है।
बीजरहित अन्य पौधे मर्चेन्टियोमोर्फा लिवरवर्ट्स, एन्थोसेरोटोफाइटा हार्मवर्ट्स, पॉलिपोडियोप्साइडा फर्न आदि और कुछ स्थानीय घास पोएसी तथा आर्किड्स ऑर्किडेसी की प्रजातियां भी इस बगीचे में हैं।बगीचे तैयार करने के लिए काई का उपयोग जापानी परंपरा है और 12 वीं से 19 वीं सदी के सामंती दौर से चली आ रही है।
हजारों साल पहले बौद्ध भिक्षुओं ने अपने मंदिर के बगीचों में मौजूद काई के बारे में लिखा। आधुनिक दौर में जापान में निजी घरों, रेस्तरां आदि में काई का सजावट के लिए उपयोग किया जाता है। दुकानदार भी अक्सर छोटे छोटे, काई के बगीचे तैयार करते हैं।
ये बगीचे उस जगह पर तैयार किए जाते हैं जिसे इमारत के अंदर से देखा जा सकता है। जापानी संस्कृति में हरे बगीचे, दीर्घकालिक जीवन का प्रतीक और ऐसे स्थान माने जाते हैं जहां आराम किया जा सकता है।
अमेरिकी या यूरोपीय परंपरा के बगीचों में जहां कई रंग और विविधता होती है वहीं काई के बगीचे में सिर्फ हरियाली के ही विभिन्न शेड्स नजर आते हैं। खूबसूरती के लिए यहां पत्थर, बांस का फव्वारा या छोटे फूलों वाली झाड़ी भी है।












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