चेन्नई से प्रणब करेंगे चुनाव प्रचार की शुरुआत

Pranab Mukherjee
दिल्ली (ब्यूरो)। वैसे तो यूपीए के राष्ट्रपति के उम्मीदवार प्रणब मुखर्जी न जाने कितनी बार तमिलनाडु गए होंगे पर इस बार जब वे तीस जून को चेन्नई पहुंचेंगे तो वे वहीं से अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत करेंगे। कांग्रेस और द्रमुक के बीच संबंधों में कटुता को कम करने के लिए वे हमेशा तमिलनाडु जाते रहे हैं पर इस बार उन्हें खुद द्रमुक ने न्योता दिया है और कहा है कि दादा यहीं से अपना चुनाव प्रचार शुरू करें।

सूत्र बता रहे हैं कि जिस दिन प्रणब की उम्मीदवारी की घोषणा की गई तो वहां द्रमुक के प्रतिनिधि के तौर पर स्टालिन और टीआर बालू उपस्थित थे और उन्होंने ही सबसे पहले प्रणब को बधाई दी और उन्हें कहा कि वे चेन्नई से अपने चुनाव प्रचार की शुरुआत करें, ऐसे द्रमुक प्रमुख की इच्छा है। सूत्र बता रहे हैं कि सोनिया गांधी के कहने के बाद दादा अब 30 जून से चेन्नई से ही अपने प्रचार की शुरुआत करेंगे। बताया जा रहा है कि जिस दिन चेन्नई दादा पहुंचेंगे उस दिन उनके स्वागत में एक भोज का भी आयोजन किया गया है।

उस स्वागत भोज में द्रमुक के सांसद और विधायक तो हाजिर होंगे ही साथ ही यूपीए के अन्य घटक दलों के नेता भी इस भोज में शिरकत करेंगे। प्रणब की आगवानी खुद द्रमुक प्रमुक के करुणानिधि करेंगे। उन्होंने कल पत्रकारों से बातचीत में कहा भी कि 2007 की तरह ही इस बार भी हम लोग आगामी राष्ट्रपति की जोरदार स्वागत करेंगे जिस प्रकार से प्रतिभा पाटिल का किया था। द्रमुक सूत्रों ने बताया कि स्वागत समारोह अड्यार पार्क शेरेटन में रखा गया है। एक सूत्र ने बताया कि द्रमुक प्रमुख करुणानिधि और प्रणब के बीच में अच्छे संबंध हैं इसलिए हमेशा जब भी संकट में कांग्रेस होती थी तो प्रणब को ही करुणानिधि को समझाने के लिए भेजती थी।

उधर, कांग्रेस ममता को छोड़कर मुलायम सिंह को साधने के बाद अब प्रणब मुखर्जी के पक्ष में सर्वसम्मति बनाने के प्रयासों में जुट गई है। साथ ही प्रणब भी अपनी जीत पक्की करने के लिए भाजपा समेत कई दलों के नेताओँ से मिल सकते हैं। बताया जा रहा है कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी भाजपा के अन्य नेताओं से बात कर सकती हैं। कांग्रेस के नेता पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से भी बात करेंगे।

मौजूदा आंकड़ों के खेल में चुनाव होने पर कांग्रेस प्रणब के रायसीना हिल्स पहुंचने में कोई दिक्कत नहीं देख रही। इसके बावजूद उसके प्रबंधक एक-एक वोट के प्रबंधन में लगे हैं। एपीजे अब्दुल कलाम के चुनाव लड़ने की संभावनाएं क्षीण होने के बाद उसकी कोशिश दादा को सर्वसम्मति से राष्ट्रपति बनाने की है। उसकी इस कोशिश में हालांकि राकांपा नेता संगमा बाधा बने हुए हैं। कलाम की अनुपस्थिति में जिस तरह भाजपा ने मुख्य विपक्षी गठबंधन राजग को एकजुट करने की कोशिश शुरू कर दी है, उससे भी कांग्रेस सतर्क है।

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