महात्मा गांधी के पत्रों की नीलामी रोकने के लिये सोनिया को पत्र

उल्लेखनीय है कि दो माह पहले 17 अप्रैल 2012 को लेखक गिरिराज ने लंदन में महात्मा गांधी के खून से सनी मिटटी और उनसे जुड़ी अन्य वस्तुओं की नीलामी रुकवाने के लिये पांच अप्रैल 2012 को प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था। वहां से कोई जवाब नहीं आने पर उन्होंने राष्ट्रपति को पत्र लिखकर उक्त नीलामी रुकवाने का आग्रह किया था।
उन्होंने कहा था कि नीलामी नहीं रुकवाने की स्थिति में वह अपना पदमश्री सम्मान वापस कर देंगे। हालांकि उन्हें अभी तक अपने पत्रों का कोई जवाब नहीं मिला है। गिरिराज किशोर को 18 अप्रैल 2007 को साहित्य क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिये पदमश्री सम्मान से नवाजा गया था। उनकी महात्मा गांधी की दक्षिण अफ्रीका यात्रा पर लिखी पुस्तक पहला गिरमिटिया पर्याप्त चर्चित रही थी।
गांधीवादी लेखक गिरिराज किशोर ने आज कहा कि उन्हें मीडिया के माध्यम से मालूम हुआ है कि अब 10 जुलाई 2012 को एक बार फिर लंदन में महात्मा गांधी के पत्रों की नीलामी की योजना बनायी जा रही है। महात्मा गांधी की वस्तुओं की 17 अप्रैल को लंदन में हुई नीलामी रुकवाने के लाख प्रयासों के बाद भी नाकामयाब रहने वाले गिरिराज किशोर अब गांधी के पत्रों की इस नीलामी से बहुत दुखी और परेशान हैं।
गिरिराज कहते है कि सरकार कोई ऐसा ठोस एवं कठोर कानून क्यों नही बनाती है, जिससे भारतीय महापुरुषों की वस्तुओं की नीलामी विदेशों में नहीं हो सकें या ऐसी नीलामी पर प्रतिबंध लग सकें। उन्होंने कहा कि गांधी जी के जिन पत्रों की नीलामी 10 जुलाई को लंदन में प्रस्तावित है वह पत्र ऐतिहासिक दृष्टि से बहुत ही महत्तवपूर्ण है। गांधी ने यह पत्र अपने जर्मन दोस्त कैलनबैक को लिखे थे।
कैलनबैक ने उस समय दक्षिण अफ्रीका की स्वतंत्रता में अपना महत्तवपूर्ण योगदान दिया था। गांधी के पत्र ऐतिहासिक हैं और यह गांधी के देश की आजादी की लड़ाई और उनके जीवन के अनछुये पहलुओं को उजागर करने में मदद कर सकते हैं। प्रमुख इतिहासकार रामचन्द्रन गुहा ने जर्मनी में गांधी के इन नीलाम होने वाले पत्रों की स्क्रीनिंग भी की थी। उन्होंने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को लिखे पत्र में उन्होंने ऐसा कठोर कानून बनाने की पहल करें करने की अपील की है, जिससे भारतीय महापुरुषों की वस्तुओं की विदेशों में होने वाली नीलामी पर रोक लगायी जा सकें।
इसके अतिरिक्त गांधी जी के पत्र और उनका पत्राचार पूरी दुनिया में फैला हुआ है इसलिए सरकार को एक ऐसा ट्रस्ट बनाना चाहिए, जिससे दुनिया भर में भारतीय महापुरुषों की वस्तुओं की नीलामी रोकने के प्रयास करे अन्यथा ऐसी वस्तुओं को खुद खरीद कर लोगों की जनभावनाओं के प्रति सम्मान स्थापित करे। गिरिराज ने सोनिया को लिखे पत्र में कहा है कि उन्हें मालूम है कि वह इस समय काफी व्यस्त हैं लेकिन उन्हें उम्मीद है कि चूंकि मामला महात्मा गांधी जैसी शख्सियत के पत्रों की नीलामी का है इसलिए वह इस दिशा में कोई ठोस कदम अवश्य उठाएंगी।
इसके अतिरिक्त गांधी जी के पत्र और उनका पत्राचार पूरी दुनिया में फैला हुआ है इसलिए सरकार को एक ऐसा ट्रस्ट बनाना चाहिए, जिससे दुनिया भर में भारतीय महापुरुषों की वस्तुओं की नीलामी रोकने के प्रयास करे अन्यथा ऐसी वस्तुओं को खुद खरीद कर लोगों की जनभावनाओं के प्रति सम्मान स्थापित करे। गिरिराज ने सोनिया को लिखे पत्र में कहा है कि उन्हें मालूम है कि वह इस समय काफी व्यस्त हैं लेकिन उन्हें उम्मीद है कि चूंकि मामला महात्मा गांधी जैसी शख्सियत के पत्रों की नीलामी का है इसलिए वह इस दिशा में कोई ठोस कदम अवश्य उठाएंगी।












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