प्रणब राष्ट्रपति बने तो होगा राहुल गांधी का रास्ता साफ!

यह पढ़कर अटपटा लग रहा होगा, लेकिन 10 जनपथ के अंदर व बाहर जो खिचड़ी पक रही है, उसकी उड़ती हुई खुश्बू कुछ इसी ओर इशारा कर रही है। राजनीतिक गणित में यह सवाल आया है, तो इसे प्रमेय लगाकर सिद्ध भी करना जरूरी है।
शुरुआत करते हैं प्रत्याशी के नाम से। सबसे पहले मैं कहना चाहूंगा कि विश्व के सबसे बड़े लोकतांत्रिक देश में सबसे बड़ी शर्म की बात यह है कि चुनाव आयोग ने चुनाव की तिथियां घोषित कर दी हैं और कोई भी पार्टी अपना प्रत्याशी अब तक तय नहीं कर सकी है। ऐसा नहीं है कि देश के सांसदों-विधायकों के पास राष्ट्रपति पद के लिए एक भी सही कैंडिडेट नहीं है, बल्कि सही मायने में राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी का नाम राजनीति के मंझे में उलझ गया है। कांग्रेस जहां अपने युवराज के करियर को जोड़ कर इस मामले को देख रही है, वहीं विपक्षी दल अपनी सुध-बुध खो बैठा है।
राहुल गांधी कैसे बन सकते हैं पीएम
युवराज की बात करें तो सीधा नाम राहुल गांधी का आता है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी यह अच्छी तरह जानती हैं कि 2014 के लोकसभा चुनाव में यूपीए की वापसी बहुत मुश्किल है। दूसरी ओर टीम अन्ना, भाजपा समेत तमाम समाजसेवी व नेता मनमोहन सिंह को कमजोर प्रधानमंत्री करार देते आ रहे हैं। ऐसे में 2014 में लोकसभा चुनाव से पहले ही कांग्रेस को अपना पीएम कैंडिडेट घोषित करना होगा।
यूपीए में प्रणब मुखर्जी पीएम पद के सबसे बड़े दावेदार हैं और सोनिया गांधी हमेशा चाहेंगी कि राहुल गांधी पीएम की कुर्सी पर बैठें। यही कारण है कि सोनिया गांधी प्रणब दा को राष्ट्रपति बनाना चाहती हैं, ताकि राहुल का रास्ता क्लियर हो जाये। रही बात उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के नाम की तो ममता के दबाव में उनका नाम लेना सोनिया की मजबूरी है।
आप सोच रहे होंगे कि जब 2014 में कांग्रेस के जीतने की कोई उम्मीद नहीं है तो प्रणब राष्ट्रपति बनने के बाद भी राहुल पीएम कैसे बन सकते हैं? इसका जवाब राजनीति की परिपाटी बयां कर रही है। देश का इतिहास गवाह है कि हर बड़े परिवर्तन में किसी न किसी की बलि जरूर चढ़ती है। इस बार बलि चढ़ेगी प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की।
राजनीतिक विशेषज्ञों की मानें तो 2013 आते-आते जब महंगाई चरम पर पहुंच जायेगी, तब मनमोहन अपनी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से ससम्मान इस्तीफा दे देंगे। ऐसा होने पर एक साल के लिए ही सही, लेकिन राहुल गांधी को पीएम बनने का अच्छा मौका मिल सकता है। अगर ऐसा हुआ, तो इसमें कोई शक नहीं कि देश की जनता एक बार फिर कांग्रेस को बहुमत से वापस ले आयेगी, क्योंकि उमर अब्दुल्ला, अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद से पूरा भारत युवा शक्ति पर कुछ ज्यादा ही भरोसा करने लगा है। लिहाजा भले ही राहुल को यूपी में मुंह की खानी पड़ी हो, लेकिन अगर 2014 में राहुल का साथ अखिलेश और उमर ने दे दिया तो उन्हें जीतने से कोई नहीं रोक सकता।
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