देश पर कुर्बानी की चाहत में उत्‍तर प्रदेश सबसे आगे

UP has the largest number of people for sacrifice their life for country
लखनऊ। देहरादून स्थित भारतीय सैन्य अकादमी में देश की सुरक्षा के लिये तैयार हुये नव सैन्य अधिकारियों में उत्तर प्रदेश के जाबांजों की संख्या सबसे अधिक है जबकि छोटा सा राज्य हरियाणा दूसरे नंबर पर है। बिहार के जवानों ने पूरे देश में तीसरा स्थान हासिल किया है। भारतीय सैन्य अकादमी में सेना के नव अधिकारियों को दिये जाने प्रशिक्षण में पिछले सत्र में भी उत्तर प्रदेश ही प्रथम नंबर पर था जबकि उत्तराखंड दूसरे नंबर पर था लेकिन पिछली बार तीसरे पायदान पर आने वाले हरियाणा ने अपने को प्रोन्नत कर इस बार द्वितीय स्थान हासिल किया और उत्तराखंड चतुर्थ स्थान पर पहुंच गया।

बिहार ने तीसरा स्थान हासिल कर लिया है। भारतीय सैन्य अकादमी में इस ग्रीष्मकालीन सत्र के दौरान पास होने वाले कुल 657 भारतीय सैन्य अधिकारियों में अकेले उत्तर प्रदेश से ही 100 अधिकारियों ने सफलता हासिल की है जो दीक्षांत परेड के बाद लेफ्टिनेंट बनकर देश की रक्षा के लिये तैयार हो गये हैं। इसी तरह दूसरे नंबर पर हरियाणा के 78 अधिकारियों को यह कामयाबी मिली है। सैन्य अकादमी से मिले नव सैन्य अफसरों के राज्यवार आंकडों के अनुसार उत्तर प्रदेश और हरियाणा की संख्या पूरे देश के अफसरों की संख्या के एक तिहाई से थोड़ा ही कम है जिन्होंने देश की सुरक्षा में अपने को बलिदान करने की चाहत दिखाई है।

सैन्य अकादमी के आंकडे़ बताते हैं कि देश पर कुर्बान होने की चाहत रखने वाले जांबाजों में तीसरे नंबर पर बिहार के जांबाज हैं जिनकी संख्या 58 है जबकि उत्तराखंड के बहादुरों की संख्या 44 है। संख्या की दृष्टि से उत्तराखंड पूरे देश में इस बार चौथे नंबर पर है जबकि पिछले सत्र के दौरान यह दूसरे नंबर पर था। आंकड़ों के अनुसार महाराष्ट्र के रणबांकुरों ने इस बार अच्छी सफलता हासिल की है। इस राज्य से 41 की संख्या में जवानों ने सेना में अधिकारी के तौर पर सफलता हासिल कर पूरे देश में पांचवां पायदान हासिल किया है। आंकडे़ बताते हैं कि राजस्थान को छठा और पर्वतीय राज्य हिमाचल प्रदेश को सातवां स्थान मिला। राजस्थान से 37 और हिमाचल प्रदेश से 35 ने सफलता हासिल की है।

इसी तरह इस बार कर्नाटक को आठवां स्थान हासिल हुआ है। इस राज्य से कुल 28 जांबाजों ने देश की सुरक्षा के लिये अपनी कुर्बानी देने की चाहत में सफलता हासिल की है। उत्तर भारतीय राज्य पंजाब ने अपने 27 जांबाजों के साथ इस बार संख्या की दृष्टि से पूरे देश में नौवां स्थान हासिल किया है। पंजाब ने पिछली बार भी अपने 29 जांबाजों के साथ राष्ट्रीय स्तर पर नौवां स्थान ही हासिल किया था। जम्मू कश्मीर अपने 26 जवानों के साथ दसवें पायदान पर है। यह पिछली बार भी इसी स्थान पर था।

इस बार मध्यप्रदेश भी अपने 26 नौजवानों के साथ दसवें स्थान पर आने में कामयाब हुआ है। दिल्ली से कुल 25 जवानों को सैन्य अधिकारी बनने का गौरव मिला है। राज्यवार दिल्ली ग्यारहवें स्थान पर है। पिछली बार आठवें पायदान पर आये दक्षिण भारतीय राज्य केरल को इस सत्र में अपने 21 जांबाजों की सफलता की दृष्टि से बारहवां स्थान मिला है। आंध्र प्रदेश से भी 21 बहादुरों ने सफलता हासिल कर अपने राज्य को पूरे देश में बारहवें स्थान पर पहुंचाया है। सैन्य अकादमी के आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल इस बार 13वें पायदान पर है।

इस राज्य से कुल 15 नवअधिकारियों ने देश की सुरक्षा की शपथ ली है। आंकडे़ बताते हैं कि मणिपुर से 14 तथा तमिलनाडु और झारखंड से तेरह-तेरह अधिकारी सफल हुये हैं। उड़ीसा से दस अधिकारियों को सफलता मिली है। इसी तरह गुजरात से सात, चंडीगढ़ से पांच, असम से चार, नगालैंड से तीन, मेघालय से दो तथा त्रिपुरा, गोवा और छत्तीसगढ़ से एक एक बहादुरों को देश की रक्षा के लिये सैन्य अधिकारी बनने का गौरव प्राप्त हुआ है। अंडमान निकोबार, अरूणाचल प्रदेश, दमन दीव, दादर और नगर हवेली, लक्षद्वीप, मिजोरम, पांडिचेरी और सिक्किम से सैन्य अधिकारी बनने के लिये कोई भी सफलता हासिल नहीं कर सका है।

सैन्य अकादमी अपनी स्थापनाकाल से अब तक देश की सुरक्षा के लिये बलिदान की चाहत रखने वाले 53 हजार से भी अधिक जांबाजों को सैन्य अधिकारी के तौर पर प्रशिक्षण दे चुकी है। इनमें से 12 अधिकारी थलसेनाध्यक्ष हो चुके हैं जबकि लेफ्टिनेंट जनरल तक पहुंचने वालों की संख्या सैकड़ों में है। इस सत्र में नेपाल से भी एक अधिकारी ने सैन्य अकादमी में प्रशिक्षण प्राप्त कर सफलता हासिल की है। भारत नेपाल मैत्री संधि के नियमों के तहत नेपाली नागरिकों को भारतीय सेना में कमीशनप्राप्त अधिकारी के रूप में समाहित किया जा सकता है।

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