पंजाब में फिर से आतंकवाद भड़कने की आशंका

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चंडीगढ़। अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में ऑपरेशन ब्लू स्टार में मारे गए लोगों की याद में स्मारक बनाए जाने के कदम ने खतरे की घंटी बजा दी है और गृह मंत्रालय को आशंका है कि इससे पंजाब में फिर से आतंकवाद भड़क सकता है। आधिकरिक सूत्रों ने बताया कि मंत्रालय पंजाब के घटनाक्रमों पर करीब से नजर रख रहा है जहां जत्थेदार अकाल तख्त ज्ञानी गुरबचन सिंह और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) के अध्यक्ष अवतार सिंह मक्कड़ सहित सिखों के पांच प्रमुख ग्रंथियों ने ऑपरेशन ब्लू स्टार की 28वीं बरसी पर छह जून को स्मारक के लिए ईंटें रखीं।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, यह बहुत ही परेशान कर देने वाली घटना है क्योंकि इस अवसर पर अलगाववादी और भारत विरोधी नारे लगाए गए। केंद्र खास तौर पर इस बात को लेकर परेशान है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई प्रतिबंधित आतंकी संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल की मदद से पंजाब में फिर से आतंवाद भड़काने की लगातार कोशिश कर रही है।

सूत्रों ने बताया कि पिछले पांच साल से पाकिस्तानी राजनयिक और आईएसआई के अधिकारी यूरोप और अमेरिका में अलगाववादी सिख नेताओं से नियमित तौर पर मिल रहे हैं और पंजाब में फिर से आतंकवाद को जीवित करने के लिए उन्हें प्रोत्साहित तथा उनकी मदद कर रहे हैं। गृह मंत्रालय कट्टरपंथी सिख समूहों दमदमी टक्साल और दल खालसा की गतिविधियों पर भी नजर रख रहा है जो समूचे पंजाब में बैठकें कर रहे हैं और 6 जून 1984 को मारे गए 220 लोगों के परिजनों को सम्मानित कर रहे हैं।

अधिकारी ने कहा, अभी हम करीब से नजर रखे हुए हैं और यदि चीजें हाथ से बाहर जाती हैं तो हमें कार्रवाई करनी होगी। भारतीय सेना ने छह जून 1984 को स्वर्ण मंदिर से सिख आतंकवादियों और उनके नेता जरनैल सिंह भिंडरवाला को बाहर निकालने के लिए ऑपरेशन ब्लू स्टार शुरू किया था। इस अभियान में भिंडरवाला अपने आतंकी साथियों सहित मारा गया था।

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