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गुड़गांव में 'जी कैब' लेकर दौड़ेंगी फीमेल ड्राइवर्स

Women drivers
गुड़गांव। आधी आबादी को यह खबर देखकर खुशी होगी की उन्हें अब टैक्सी से कहीं जाने के लिए जैंट्स ड्राईवर से तकरार या मान मुन्नवल करना नहीं पड़ेगा। साइबर सिटी की महिलाओं की सुरक्षा का ख्याल रखते हुए महिलाओं के लिए स्पेशल 'जी कैब' की शुक्रवार से शुरूआत की गई। इस 'जी कैब' की खासियत यह है कि इसमें महिला यात्रियों के लिए महिला चालक होंगी।

अभी फिलहाल महिला चालक साढ़े छह बजे तक काम करेंगी। सरकार से लाइसेंस मिलने के बाद वह रात्रि 10.30 बजे तक काम करेंगी। महिला चालक की सुरक्षा का भी खास तौर से ख्याल रखा जाएगा। इसके लिए महिला चालक को विशेष तौर से सेल्फ सिक्योरिटी की ट्रेनिंग भी दी जाएगी।

जी कैब के निदेशक अभिषेक शर्मा ने इस वाहन की खुबियों के बारे में बताया कि इसे जल्द ही कैब्स शेयरिंग बेसिस पर भी संचालित किया जाएगा। इसके साथ ही इसमें पुरुष यात्रियों के लिए पुरुष चालक उपलब्ध कराए जाएंगे।

उम्मीद जताई कि साल के आखिर तक कैब्स की संख्या बढ़ा दी जाएगी। उन्होंने इस वाहन की खासियत बताते हुए कहा कि ग्राहक को कैब में पानी व स्नैक्स की सुविधा सहित इंटरनेट चलाने की सुविधा भी दी जाएगी। इसके लिए उसे केवल 20 रुपए प्रति किलोमीटर देना होगा। कैब में शेयरिंग सुविधा को लेकर सरकार से बातचीत चल रही है।

अनुमति मिलते ही इसमें शेयरिंग सुविधा को भी शुरू कर दिया जाएगा। इसके अलावा कैब में साफ-सफाई का खासतौर से ख्याल रखा जाएगा ताकि ग्राहक को अच्छा वातावरण दिया जाए।

हरदम रहेगी विजिलेंस की रहेगी नजर

जी कैब की सीईओ बबिता ने बताया कि महिलाओं के साथ-साथ अन्य ग्राहकों की सुरक्षा के लिए स्पेशल सुरक्षा सेल बनाया गया है जिसे विजिलेंस विभाग का नाम दिया गया है। दिल्ली के पूर्व एसीपी केएस बेदी इसके डायरेक्टर हैं। कैब में दो पैनिक बटन दिए गए हैं। एक बटन ग्राहक व एक चालक के लिए है।

यदि दोनों में किसी को भी कोई प्रॉब्लम आती है तो वह तुरंत इस बटन का इस्तेमाल कर सकता है। बटन दबाने के बाद विजिलेंस विभाग यानि की कॉल सेंटर में रेड लाइट फ्लैश होगी।

ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम यानी जीपीएस के तहत कैब की जगह को ट्रैक करके विजिलेंस की टीम 20 मिनट के अंदर कैब वाली जगह पर पहुंचेगी। उन्होंने बताया कि महिला चालक केवल महिला ग्राहक के लिए होंगी। दिल्ली के पूर्व एसीपी केएस बेदी ने बताया कि जी कैब में ग्राहकों की सुरक्षा का ख्याल रखते हुए प्रत्येक चालक का पिछला रिकॉर्ड और लाइसेंस की जांच की जा रही है।

कोई चालक कितने घर बदल चुका है, जिस घर का उसने पता दिया वहां कितने सालों से रह रहा है, उसका कोई पुलिस रिकॉर्ड तो नहीं, लाइसेंस असली है या नकली, जैसे बातों का ख्याल रखने के बाद ही उन्हें भर्ती किया जा रहा है।

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