रैगिंग हुई तो सिर्फ छात्र नहीं वीसी या प्रिंसिपल को भी हो सकती है जेल

विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों तथा व्यवसायिक संस्थानों को सामाजिक, मानसिक, शारीरिक अन्याय तथा रैगिंग के रूप में अन्य प्रकार की प्रताडऩा से मुक्त करने के लिए इस अध्यादेश को अनुमोदित किया गया है क्योंकि विधानसभा का अभी सत्र में नहीं है और विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों के शैक्षणिक सत्र जुलाई से शुरू होंगे और इस लिए प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों में रैगिंग निषेध के लिए एक अध्यादेश पारित करना अनिवार्य है।
अपराध की सघनता और उसकी प्रकृति अनुसार संस्थान के मुखिया द्वारा उस विद्यार्थी पर जुर्माना लगाया जा सकता है इसमें विद्यार्थी को शैक्षणिक संस्थान से तीन वर्षों की अवधि तक निकालना और अन्य किसी शैक्षणिक संस्थान में दाखिले से तीन वर्ष की अवधि तक रोकना तथा 25,000 रुपये तक का जुर्माना लगाना शामिल होंगे।
वहीं अध्यादेशों या निर्देशों या आदेश के प्रावधानों की उल्लघंना करने की स्थिति में शैक्षणिक संस्थान के मुखिया इसके लिए उत्तरदायी होंगे और उसे छ: वर्ष तक की कैद की सजा के साथ जुर्माना हो सकता है और इसे 25,000 रुपये तक बढाया जा सकता है।
समय समय पर सरकार द्वारा जारी प्रावधानों, निर्देशों और आदेशों की अनुपालना नहीं की जाने की स्थिति में सरकार शैक्षणिक संस्थान पर जुर्माना लगायेगी, जो महाविद्यालय या स्कूल के संबंध में दो लाख रुपये तक हो सकता है तथा विश्वविद्यालय के संबंध में यह राशि पांच लाख रुपये होगी। बहरहाल, शैक्षणिक संस्थान को व्यक्तिगत सुनवाई का अवसर दिया जायेगा।












Click it and Unblock the Notifications