अब प्रधानमंत्री पर विश्वास नहीं रहा: अन्ना हजारे

ऐसा करके ही वह बदलाव लाया जा सकता है जिसकी हमें अपेक्षा है। उन्होंने अफसोस जाहिर किया कि पिछले 65 सालों के दौरान लोकसभा या विधानसभाओं की ओर से जनहित में एक भी कानून पारित नहीं हुआ। हजारे ने कहा, उनमें से ज्यादातर भ्रष्टाचार में शामिल हैं और लोक सूचना की कमी का फायदा उठा रहे है। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्यादातर सार्वजनिक कोष का इस्तेमाल नेताओं और अधिकारियों की ओर से भ्रष्ट गतिविधियों के लिए किया जाता है।
इसकी सिर्फ 10 फीसदी राशि विकास से जुड़े कामों में की जाती है। हजारे ने सवालिया लहजे में कहा, ऐसे हालात में हम किस तरह राष्ट्रीय विकास की अपेक्षा कर सकते हैं? गौरतलब है कि हजारे सशक्त लोकपाल विधेयक के सिलसिले में फिलहाल महाराष्ट्र के दौरे पर हैं। मालूम हो कि कैग रिपोर्ट के बाद से प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पर आरोपों की बोछार होने लगी है।












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