यूपीए का पॉलिटिकल स्टंट, टीचरों लुभाने में जुटे सिब्बल

शिक्षकों की कमी और प्रशिक्षण की चुनौतियों से जूझ रहे देश को कुछ दिनों में राहत मिल सकती है। क्योंकि केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने शिक्षकों का एक डाटा तैयार करने की वकालत की है जिससे समय आने पर उसका उपयोग किया जा सके। इस डाटा बैंक में वे विभिन्न विषयों और भाषाओं के शिक्षकों को शामिल करना चाहते हैं।
एक कार्यक्रम में सिब्बल ने इस संदर्भ में यूनेस्को की बैठक बुलाने का भी ऐलान किया। इस बैठक का मकसद यह अनुमान लगाना होगा कि मौजूदा परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय समुदाय और दुनियाभर में बच्चों की क्या जरूरतें हैं।
उनके मुताबिक, भारत जैसे गरीब देश में शिक्षकों की गुणवत्ता खास मायने रखती है। इससे निपटना होगा। इसके बगैर किसी भी विकास कार्य के उद्देश्य को हासिल करना मुश्किल है। सिब्बल ने शिक्षण की पद्धति में भी बदलाव पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि स्कूलों में मूल्यांकन कार्यक्रम सिर्फ छात्रों तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए। इसके दायरे में शिक्षकों को भी लाना चाहिए। इससे शिक्षकों को यह जानने में मदद मिलेगी कि आखिर वे कहां ठहरते हैं।
कार्यक्रम में सिब्बल ने कहा कि जब तक शिक्षकों को उचित लाभ नहीं मिलेगा, अच्छी प्रतिभाएं इस क्षेत्र की ओर आकर्षित नहीं होंगी। उन्होंने कहा, 'शिक्षकों के वेतन में समानता नहीं है। उन्हें कोई चिकित्सा लाभ, आवास भत्ता या अन्य सुविधाएं व पेंशन नहीं मिलता है।' उनके अनुसार, 'अभिभावक भी अपने बच्चों को ऐसी नौकरी के लिए प्रोत्साहित करते हैं, जिससे उन्हें अधिक पैसे मिले। जब तक हम यह न मान लें कि बच्चों को शिक्षित कर मानवीय पूंजी निर्माण करना सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, हम कुछ नहीं कर सकते।'
सिब्बल ने यह भी कहा कि एक ऐसी व्यवस्था बनाने की जरूरत है, जिससे शिक्षकों को अपने क्षेत्र के बारे में जानकारी अद्यतन करने में मदद मिल सके। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए 12वीं पंचवर्षीय योजना में राष्ट्रीय मिशन शुरू किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार करना है।












Click it and Unblock the Notifications