संगमा के खिलाफ अपनों ने ही खोला मोर्चा

वहीं, जोगी के साथ मंच पर आए कांग्रेस के कुछ पूर्व जनजातीय समुदाय के सांसदों ने भी संगमा की उम्मीदवारी का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति पद एक बेहद महत्वपूर्ण पद है और किसी को भी इस तरह आदिवासी होने के नाम पर पद की मांग नहीं करना चाहिए। विरोध करने वालों में अभी संसद की 60वीं वर्षगांठ पर सम्मानित किए गए सांसद और पूर्व मुख्यमंत्री रीशांग कीशिंग भी हैं।
उन्होंने कहा कि संगमा पूरे आदिवासी समूह का प्रतिनिधित्व नहीं करते। इसलिए उन्हें कोई हक नहीं बनता कि वे आदिवासियों के नाम पर चुनाव लड़े। वैसे भी वे 1992 में पूर्वोत्तर के जनजातीय नेता जी.जी. स्वेल के राष्ट्रपति पद के चुनाव लड़ने का विरोध कर चुके हैं। इसलिए संगमा को पहले अपने अंदर झांक कर देखना चाहिए। अजित जोगी के विरोध के बाद तो अब साफ हो गया है कि यदि कांग्रेस अब किसी भी कीमत पर संगमा का समर्थन नहीं करेगी। हालांकि संगमा को भाजपा से काफी उम्मीदें हैं।












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