बाबा जयगुरुदेव की सम्पत्ति पर शुरू हुआ झगड़ा

Spiritual Guru Baba Jai Gurudev
लखनऊ। बाबा जय गुरूदेव ने अपनी आंखें क्या बंद की उनकी सम्पत्ति को लेकर विवाद शुरू हो गया। एक ओर उनकी अकूत सम्पत्ति पर ट्रस्टी कब्जा करना चाहते हैं तो दूसरी ओर सत्संगी सम्पत्ति पर अपना हक जता रहे हैं। उत्तराधिकारियों में बाबा की ओर से बोला गया एक नाम है तो दूसरी ओर कुछ लोग दाह संस्कार करने वाले को ही उत्तराधिकारी ठहराने में जुटे हैं। ज्ञात हो कि बाबा को मुखाग्नि उनके ड्राइवर पंकज ने दी थी।

पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गॉधी, पूर्व राज्यपाल रोमेश भण्डारी, भारतीय जनता पार्टी के नेता राजनाथ सिंह, कांग्रेस नेता नारायण दत्त तिवारी, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव जैसे वरिष्ठ राजनेताओं से लेकर अनपढ़ गरीब किसान तथा विदेशों में उनके लाखों अनुयायी थे। बाबा का मथुरा में दिल्ली आगरा रोड पर एक विशाल आश्रम हैं जिसकी 80 एकड़ की भूमि को लेकर आश्रम के लोगों में आपस में ठन गयी है।

इतना ही नहीं बाबा के पास चल अचल और भी सम्पत्ति है जिस पर अपना हक साबित करने के लिए उनके सत्संगी व ट्रस्टी आमने सामने आ गए हैं। सूत्रों की माने तो अब आश्रम इतना प्रभावशाली कोई नहीं रहा जिसकी बात सभी माने इसी कारण बिखराव हो गया है। उल्लेखनीय है बाबा ने कई सामाजिक कार्यों को प्रोत्साहित किया जिसमें निशुल्क चिकित्सा, निशुल्क शिक्षा, सामूहिक विवाह, मद्यनिषेध, शाकाहार व वृक्षारोपण आदि प्रमुख हैं।

उत्तर प्रदेश में इटावा जिले के खिटोरा गांव में जन्मे बाबा जय गुरूदेव का वास्तविक नाम तुलसीदास था। कम उम्र में ही बाबा के माता पिता का देहांत हो गया और वह सत्य की खोज में निकल पड़े। इसी दौरान उनकी मुलाकात संत घूरेलाल जी से हुई और बाबा ने उन्हें अपना गुरू मान लिया। संत घूरेलाल के निधन के बाद जय गुरूदेव ने मथुरा जिले में आगरा दिल्ली राजमार्ग पर अपने गुरू की याद में चिरौली संत आश्रम की स्थापना की और समाज सेवा में जुट गये। जय गुरुदेव ने हमेशा गरीबों की मदद की। वह शराब के खिलाफ थे और हमेशा शाकाहारी भोजन के लिए प्रेरित करते थे।

उन्होंनें वर्ष 1962 में मथुरा में आगरा दिल्ली राजमार्ग पर स्थित मधुवन क्षेत्र में डेढ़ सौ एकड़ भूमि खरीदकर अपने मिशन को और विस्तार दिया। बाबा अपने प्रत्येक कार्य में अपने गुरूदेव का स्मरण करते थे इसीलिए वह बाबा जय गुरूदेव के नाम से प्रसिद्ध हो गये। वर्तमान में जय गुरदेव धर्म प्रचारक संस्था एवं जय गुरदेव धर्म प्रचारक ट्रस्ट चल रहा है जिनके तहत तमाम लोक कल्याणकारी संस्थायें चल रही है। कुछ वर्ष पहले तक बाबा स्वयं भी श्रमदान किया करते थे। आश्रम की लगभग 80 एकड़ की भूमि पर आधुनिक तौर तरीकों से खेती होती है जिससे आश्रम की भोजन व्यवस्था चलती है।

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