150 गज ज़मीन बचाने के लिए कुर्बानी को तैयार हैं 10 जानें

euthanasia
हिन्दुस्तान में गरीब होना गुनाह है। गरीब की कहीं भी कोई भी सुनवाई नहीं है। जहां भी वो अपनी शिकायत दर्ज कराने जाता है उसे दुत्कार के भगा दिया जाता है। या यूं कहें की गरीब आदमी जहां भी जाता है उसको केवल दबाया ही जाता है। गरीब पर हर कोई अपना रौब दिखाता है हर इंसान उसकी गुरबत का मजाक उडाता है।

अक्सर ये देखने को मिलता है की इससे या तो गरीब आदमी हालात से विवश होकर परिस्थितियों से समझौता कर लेता है और चुप हो जाता है। या फिर वो बगावत को अंजाम देता है और बागी कहलाता है।

ऐसी ही एक बगावत का मामला आया है हरियाणा के गुडगांव से जहां दबंगों के जुल्म से तंग आकर एक ही परिवार के दस सदस्यों ने राष्ट्रपति और डीजी को पत्र लिखकर इच्छा मृत्यु की मांग की है। पीड़ित परिवार का आरोप है की गाँव के दबंगों द्वारा उनके प्लाट पर कब्ज़ा कर लिया गया है और पुलिस द्वारा अब तक इस मामले पर कोई कार्यवाही नहीं की गयी है। पीड़ित परिवार जल्द ही अपनी याचिका जिला अदालत में पेश करेगा।

बंधवाड़ी निवासी 55 वर्षीय रणबीर ने जानकारी देते हुए बताया की 19 मई को उन्होंने और उनके परिवार के अन्य सदस्यों ने पुलिस आयुक्त को मामले की लिखित शिकायत दी थी। लेकिन पुलिस विभाग द्वारा अब तक उनकी कोई भी मदद नहीं की गयी है।

अपनी शिकायत में रणबीर ने बताया है की गांव के ही ब्राह्मण जाति के रघुबीर ने अपने बेटों के साथ मिल कर उसके 150 गज के प्लॉट पर कब्जा कर लिया। 19 मई की रात को आरोपियों ने पूरे परिवार को बंधक बना लिया और प्लॉट पर चारदीवारी का कार्य पूरा होने के बाद ही परिवार के लोगों को मुक्त किया । पीड़ित ने ये भी बताया की शिकायत करने के बाद पुलिस ने भी जबरन राजीनामा कराकर उन्हें पुलिस चौकी से भगा दिया।

रणबीर ने बताया कि पुलिस की ओर से कोई सहायता न मिलने पर उन्होंने पूरे परिवार के साथ मिलकर इच्छामृत्यु मांगने का विचार किया है। इसी के चलते मंगलवार को वे अपनी पत्नी ज्ञानवती, भाई नेत्रपाल, वेदपाल, बेटे रवि, अमित, बेटी तन्नू, बेटे रवि की पत्नी प्रेमलता व रवि के बच्चों लक्की व हर्ष के साथ जिला अदालत पहुंचा। मंगलवार को उन्होंने राष्ट्रपति प्रतिभा देवी सिंह पाटिल और डीजी पीसी मीणा को पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की इजाजत मांगी है।

पीड़ित के वकील दुर्गेश बोकन ने जानकारी देते हुए बताया कि जिला अदालत में दस्तावेज तैयार होने के कारण याचिका मंगलवार को नहीं डाली जा सकी। इस पूरे घटनाक्रम के विषय पर पूछे जाने पर पुलिस आयुक्त केके संधू ने बताया कि, यह मामला अभी उनके संज्ञान में नहीं आया है। पूरे मामले की जांच करा कर पीड़ित परिवार को न्याय जरूर दिलवाया जाएगा।

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