'एयर इंडिया के पायलट तुरंत हड़ताल खत्‍म कर ड्यूटी ज्‍वाइन करें'

air india
लखनऊ। एयर इंडिया पायलटों की हड़ताल के बारहवें दिन आज सरकार ने पायलटों से काम पर लौटने की अपील करते हुये उनकी समस्यायें तीन माह में सुलझाने का वादा किया है। केन्द्रीय नागर विमानन मंत्री अजित सिंह ने कहा कि एयर इंडिया पायलटों की जो भी समस्याएं हैं वह हड़ताल समाप्त कर बातचीत के लिये आगे आयें।

अजित ने यहां चौधरी चरण सिंह हवाई अड्डे पर नये टर्मिनल का उद्घाटन करने के बाद संवाददाताओं से बातचीत में कहा कि स्थिति को सुलझाने के प्रयास किये जा रहे हैं। पायलटों से मेरी अपील है कि वे यात्रियों के व्यापक हित के बारे में सोचें। उन्होंने कहा कि एयर इंडिया को आर्थिक क्षति अथवा यात्रियों को असुविधा पहुंचाकर यह संभव नहीं है।

सरकार उत्पीड़न की कार्रवाई नहीं करेगी। पायलटों की जो भी समस्याएं हैं उन्‍हें तीन महीने में सुलझा लिया जायेगा। बर्खास्त पायलटों की बहाली के सवाल पर अजित ने कहा कि पायलट काम पर लौटे, सरकार की ओर से उत्पीड़न की कोई कार्रवाई नहीं होगी। उन्होंने कहा कि पायलटों की समस्याओं पर विचार करने के लिये जब न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) धर्माधिकारी समिति की रिपोर्ट आने वाली है, ऐसे में हड़ताल का कोई औचित्य नहीं बनता और उन्हें हड़ताल समाप्त कर काम पर लौट आना चाहिये।

अजित ने कहा कि दिल्ली हाई कोर्ट पहले ही पायलटों की हड़ताल को गैर कानूनी करार दे चुका है। उन्होंने कहा कि अदालत ने पायलटों की हडताल को गैर कानूनी करार दिया है। उन्‍हें कानून का सम्मान करना चाहिये और काम पर वापस लौट आना चाहिये। बर्खास्त पायलटों की बहाली की सम्भावनाओं सम्बन्धी सवाल पर नागर उड्डयन मंत्री ने कहा हम बार-बार कह चुके हैं, और मैंने यह बात संसद में भी कही है कि पायलटों को काम पर वापस आना चाहिये।

सरकार उनके खिलाफ कोई बदले की कार्रवाई नहीं करेगी। उड्डयन मंत्री ने कहा कम्पनी को क्षति पहुंचाकर अथवा यात्रिओं को परेशान करके समस्या का निदान सम्भव नहीं है। पर्यटन गतिविधियों के लिहाज से यह चरम व्यस्तता वाला समय है ऐसे में हड़ताल से कंपनी को भारी नुकसान होगा। जो भी समस्यायें हैं उन्हें बातचीत के जरिये सुलझाया जाना चाहिये।

उन्होंने पायलटों की हड़ताल से एयर इंडिया को हुए नुकसान की बात करते हुए कहा कि विगत तीन महीनों में ना सिर्फ इसकी विश्वसनीयता बढ़ी थी, बल्कि इसके राजस्व में भी 35 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गयी थी, मगर हड़ताल से सब धुल गया। अजित ने कहा कि यह एयर इंडिया के अस्तित्व का सवाल है, अगर कम्पनी ही नहीं रहेगी तो तनख्वाह, प्रोन्नति और वेतन वृद्धि सब निरर्थक हो जाएगा।

नागर विमानन क्षेत्र के समक्ष उत्पन्न आर्थिक समस्याओं के सवाल पर उन्होंने कहा कि भारत में विमान ईंधन एयर टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) पर 40 से 50 प्रतिशत कर लगता है जबकि दूसरे देशों में यह 30 से 35 फीसद ही है। इसमें कमी होनी चाहिये। नागर उड्डयन मंत्री ने कहा अगर लागत कम नहीं की गयी तो निश्चित रूप से समस्याएं तो रहेंगी ही, बावजूद इसके यात्रियों की बढ़ती संख्या और हवाई मार्ग से बढ़ते व्यापार के मद्देनजर इस क्षेत्र का भविष्य उज्ज्वल है।

एयर इंडिया के कुल राजस्व में से 64 प्रतिशत अंतरराष्ट्रीय परिचालन से आता है। वहीं उसके परिचालन नुकसान में 80 फीसद योगदान भी अंतरराष्ट्रीय परिचालन का है। मंत्री ने अगले सप्ताह एयर इंडिया की सभी मान्यता प्राप्त यूनियनों की बैठक बुलाई है जिसे कैरियर में प्रगति और वेतनमान जैसे मुद्दों पर विचार होगा।

यह कदम कंपनी में भविष्य में किसी तरह की श्रम समस्या को रोकने और विलय के बाद एयर इंडिया कर्मियों के एकीकरण की प्रक्रिया के लिए समर्थन जुटाने के लिए उठाया गया है, क्योंकि वेतन और कैरियर में प्रगति के मुद्दे पर कुछ असंतोष पैदा हो सकता है।

हालांकि अजित सिंह ने कहा है कि यह बैठक सिर्फ चीजों को समझने के लिए बुलाई गई है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि एचआर संबंधी मसलों के अलावा धर्माधिकारी समिति की सिफारिशों, पुनरोद्धार योजना और वित्तीय पुनर्गठन योजना पर इस बैठक में विचार विमर्श होगा। उन्‍होंने कहा कि सभी वगो के कर्मचारियों को भविष्य की वृद्धि के व्यापक परिदृश्य को देखना होगा।

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