'सपा सरकार बसपा फोबिया से पीड़ित'

बसपा प्रवक्ता का कहना है कि एनआरएचएम केन्द्र पोषित योजना है जो सपा के ही पिछले शासनकाल वर्ष 2005 से प्रदेश में चलायी जा रही है। इसमें गड़बड़ी सामने आते ही मायावती ने अपने शासनकाल के दौरान कड़ी कार्रवाई करते हुए दो-दो मंत्रियों को बर्खास्त किया और मामले की सीबीआई नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (कैग) से कराने का फैसला लिया। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का नाम लिये बैगर उन्होंने कहा कि सपा सरकार के मुखिया एवं उसके मंत्री इस मुद्दे पर ऐसी बयानबाजी कर रहे हैं जैसे वे स्वयं जांच एजेंसी हों।
उन्होंने कहा कि ऐसा वे राजनीतिक दुर्भावना के तहत जनता को गुमराह करने के लिए कर रहे हैं जबकि हकीकत यह है कि सीबीआई जांच में प्रगति होने के कारण राज्य सरकार को अपने ओहदे की जि मेदारी निभाते हुए अपनी जुबान बन्द रखनी चाहिए और जांच नतीजों का इन्तजार करना चाहिए।
बसपा प्रवक्ता ने कहा कि परिवार कल्याण विभाग वर्ष 2007 से 2009 तक मायावती के अधीन अवश्य था लेकिन एनआरएचएम के क्रियान्वयन या इस बारे में किसी भी प्रकार की वित्तीय स्वीकृति आदि से संबंधित कोई भी पत्रावली या किसी भी बिंदु पर स्वीकृति न तो उच्चस्तर से उनसे कभी मांगी गयी और न ही ऐसा करने की कानूनी जरुरत थी।
उन्होंने संबंधित कानून के हवाले से कहा कि एनआरएचएम की कार्रवाई राज्य स्वास्थ्य सोसाइटी की दो समितियों कार्यकारी समिति जिसके अध्यक्ष विभाग के प्रमुख सचिव होते हैं तथा गवॄनग बाडी जिसके अध्यक्ष प्रदेश के मुख्य सचिव होते हैं। गवर्निंग बॉडी के अनुमोदन के बाद केन्द्र सरकार की अनुमति प्राप्त कर उसी के निर्देशानुसार विभिन्न जिलों में कराया जाता है। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम की पूरी धनराशि केन्द्र सरकार द्वारा सीधे राज्य स्वास्थ्य सोसाइटी को भेज दी जाती है और इसमें प्रदेश सरकार का कोई सीधा हस्तक्षेप नहीं होता है।












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