सिंधू घाटी सभ्यता की भाषा समझने के करीब पहुंचे वैज्ञानिक

130 साल पहले सिंधू घाटी सभ्यता का पता चला था। उसके बाद से कम से कम 100 बार उसकी भाषा समझने की कोशिश की गई लेकिन कामयाबी नहीं मिली। कुछ वैज्ञानिकों ने दावा किया था कि सिंधू घाटी की सभ्यता मे जिस लिपि मिली है। वह महज कला है। यह कोई भाषा नहीं है। साइंटिस्ट पत्रिका ने वैज्ञानिकों के हवाले से कहा है कि लिपि की जगह इसमें चिह्न का इस्तेमाल किया गया है। जिसका स्पष्ट रूप से मतलब है।
इसपर शोध कर रहे टाटा इंस्टीयूट आफ फंडामेंटल रिसर्च के वैज्ञानिकों के निशा यादव और मयंक के मुताबिक यह निश्चित रुप से भाषा है। हरेक वाक्य में स्पष्ट तौर पर संबंध है। इस प्रोजेक्ट में अमेरिका और भारत के तमाम वैज्ञानिक और साफ्ट वेयर इंजीनियर शामिल हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक सिंधू घाटी सभ्यता की भाषा अन्य भारतीय भाषाओं से अलग है। निशा यादव ने बताया कि हम लोग इसकी लिपि को समझने के करीब हैं। जल्द ही इसकी भाषा समझने में हम कामयाब हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि हम फिलहाल लिपि को लिखने के प्रयास में लगे हैं । फिर उसके बाद इस लिपि को पढ़ने का सिलसिला शुरू किया जाएगा।












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