पड़ोसी मुल्कों को साधने में जुटा भारत

लुक ईस्ट पालिसी के तहत भारत ने एक बार फिर अपने पड़ोसी मुल्कों पर ध्यान दिया है। इसी कड़ी के तहत भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह जहां मालदीव के मामले को सुलझाने में लगे हुए हैं वहीं वह म्यांमार में बह रही लोकतंत्र की नींव को और मजबूत करने के लिए वह संभवतः 29 मई को यंगून जा रहे हैं। वहां वे कई समझौते भी करेंगे जिसमें म्यांमार के विकास और आन सांग सूची के लोकतंत्र के लिए वहां की सरकार को मनाने का प्रयास करेंगे। वे यंगून में अंतिम मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर के मकबरे पर भी जाएंगे जहां अंग्रेजों ने उन्हें बंद कर दिया था।
विदेश मंत्रालय ने बताया कि प्रधानमंत्री दागवान में स्थित बहादुर शाह जफर की मजार पर करीब आधा घंटे रुकेंगे। गौरतलब है कि बादशाह की असली कब्र की बात सामने आने के बाद यह पहला मौका है जब भारत का कोई प्रधानमंत्री मुगल बादशाह के स्मृति स्थल पर पहुंचेगा। इससे पहले 1987 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी भी अपने यंगून दौरे में जफर के मकबरे गए थे। अंतिम मुगल सम्राट की मौत को इस वर्ष 150 साल पूरे हो रहे हैं।
हालांकि म्यांमार के लोग भारत को बहुत अच्छी निगाह से नहीं देखते पर संबंध सुधार की कवायद के तहत यह यात्रा बहुत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सूत्रों का कहना है कि इस दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ईरान भी जा सकते हैं जहां ईरान से कुछ महत्वपूर्ण समझौते हो सकते हैं जिसमें ईरान से गैस पाइप लाइन के कुछ अन्य मुद्दों पर सहमति बन सकती है।












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