गडकरी के लिए नियम बदल देगी भाजपा

Nitin Gadkari
नई दिल्‍ली। भारतीय जनता पार्टी के संविधान में लिखा है कि एक व्‍यक्ति केवल एक बार ही अध्‍यक्ष बन सकता है। लेकिन नितिन गडकरी के लिए भाजपा इस नियम को तोड़ने जा रही है। हालांकि ऐसा पहली बार नहीं बल्कि दूसरी बार होगा। इससे पहले लाल कृष्‍ण आडवाणी के कार्यकाल में भी ऐसा ही हुआ था। अब तक आप समझ गये होंगे कि गडकरी को एक बार फिर पार्टी की कमान सौंपी जायेगी।

गडकरी के नेतृत्‍व में पार्टी ने इस साल विधान सभा चुनावों में दो राज्‍यों पंजाब और गोवा पर कब्‍जा किया। हालांकि यूपी में पार्टी को खास फायदा नहीं हुआ। लेकिन फिर भी अगर गडकरी के पार्टी में योगदान की बात करें तो उन्‍होंने कई मुद्दों को चुटकियों में सुलझा दिया। ज्ञात हो कि गडकरी को आरएसएस ने भाजपा के अध्‍यक्ष पद के लिए नामित किया था। कुल मिलाकर देखा जाये तो गडकरी को दोबारा पार्टी का राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष नियुक्‍त किये जाने पर सबसे ज्‍यादा खुश आरएसएस होगी।

भाजपा के वरिष्‍ठ नेताओं को पूरा विश्‍वास है कि गडकरी के नेतृत्‍व में पार्टी लोकसभा चुनाव 2012 में बेहतरीन प्रदर्शन करेगी, यूं कहिये कि भाजपा को पूरा विश्‍वास है कि अगली बार सत्‍ता की चाबी उसे ही मिलेगी।

गडकरी के नेतृत्‍व क्षमता की बात करें तो उन्‍होंने अपने कार्यकाल में बड़े-बड़े मैटर चुटकियों में सुलझाये हैं। फिर वो चाहे कर्नाटक में येदियुरप्‍पा की वजह से पार्टी में विवाद हो या फिर बाबू सिंह कुशवाहा की वजह से यूपी विंग में उथल-पुथल। गडकरी को पानी में उठने वाली ऊंची लहरों को शांत कराना अच्‍छी तरह आता है। यही कारण है कि पार्टी के वरिष्‍ठ नेता गडकरी को ही अध्‍यक्ष पद पर दोबारा देखना चाहते हैं।

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