लापता रूसी विमान का मलवा मिला, 50 की मौत

सुखोई कंपनी के अधिकारियों ने बताया कि विमान में भरपूर ईधन था, वह चार घंटे अधिक उड़ान जारी रख सकती थी। विमान की तलाश कर रहे हेलीकॉप्टर ने इंडोनेशिया की पहाड़ों पर इसका मलवा करीब 5500 फीट की ऊंचाई देखा है। सैन्य विभाग के लिए सुखोई बनाने वाली इस कंपनी का यह पहला यात्री विमान था। मध्यम दूरी तक जाने वाले इस सुपरजेट की क्षमता केवल सौ यात्रियों को ले जाने की थी।
गौरतलब है कि रूस के एक हवाई जहाज ने बुधवार को उड़ान भरी और इंडोनेशिया के हवाई क्षेत्र में अचानक लापता हो गया। विमान में 50 लोग सवार हैं। हाल ही में तैयार किया गया यह विमान उस समय लापता हुआ जब उसे मीडिया व खरीददारों के समक्ष प्रदर्शन के लिए उड़ाया गया। यह इंडोनेशिया के पहाड़ी इलाकों के बीच गायब हो गया।
इंडोनेशिया एयर कंट्रोल विभाग के मुमताबिक विमान से दोपहर 2:41 बजे (स्थानीय समयानुसार) अंतिम संपर्क हुआ था। उसके बाद से उसका कुछ पता नहीं। जकारता के दक्षिण की ओर स्थित पहाड़ों पर मौसम भी काफी खराब है। विमान को खोजने के लिए निकले दो हेलीकॉप्टर भी खराब मौसम की वजह से वापस लौट आये।
इंडोनशियाई परिवहन मंत्रालय के प्रवक्ता बांबांग एरवान के मुताबिक तलाशी और बचाव दल को इस इलाके में रवाना कर दिया गया है। उनहोंने बताया कि लापता सुखोई सुपरजेट-100 विमान ने हालिम पेरदानाकुसुमा एयरपोर्ट से दोपहर 2.21 पर उड़ान भरी थी। उड़ान भरने के 21 मिनट बाद विमान राडार की पहुंच से गायब हो गया।
इलाके के आस पास के गांवों में कुछ लोगों के मुताबिक एक विमान काफी नीचे उड़ान भरता हुआ गुजरा था। पहाड़ी इलाके में चारों तरफ मूसलाधार बारिश हो रही है। साथ ही घने बादल भी छाये हुए हैं, लिहाजा सैटेलाइट कैमरों में भी इलाके की तस्वीरें लेने में दिक्कत आ रही है। उधर रूस से जांच दल निकल चुका है जो गुरुवार को इंडोनेशिया पहुंच जायेगा।
अगर भारत में हुईं ऐसी घटनाओं को याद करें तो यहां आंध्र प्रदेश की पहाडि़यों में ठीक इसी प्रकार पूर्व मुख्यमंत्री वाईएसआर रेड्डी का विमान लापता हुआ था। तब भी मूस्लाधार बारिश हो रही थी और घने बादल छाये हुए थे। वहीं असम में दोरजी खांडू का विमान भी ऐसी ही परिस्थितियों में लापता हुआ था। इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि रूसी विमान में सवार यात्रियों के बचने की संभावनाएं कितनी कम हैं।












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