अखिलेश यादव करेंगे यूपी की बेटियों का कन्या दान

यह सहायता उन्हें कन्यादान के लिये मिलेगी जिसके लिए श्रम विभाग को अधिकृत किया गया है। सरकार के इस निर्णय से मजदूरों में काफी खुशी है। बेटियां अब माता पिता के लिए अभिशाप नहीं रही। सरकार ने गरीब मजदूरों की बेटियों की शादी में आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
प्रदेश के श्रमायुक्त डा. हरशरण दास ने बताया कि इस योजना के लागू होने से प्रदेश के आर्थिक रुप से पिछड़े हुए श्रमिकों को न केवल राहत मिलेगी बल्कि इसके फलस्वरुप इस वर्ग के परिवारों में अपनी पुत्रियों को बोझ समझकर उनको तिरस्कृत करने की प्रवृत्ति भी समाप्त होगी। साथ ही पुत्र और पुत्रियों के बीच व्याप्त भेदभाव भी समाप्त हो सकेगा।
श्रमायुक्त ने बताया कि यह लाभ केवल उन्हीं कन्याओं के लिये अनुमन्य होगा जिनके पिता माता कारखाना अधिनियम के अन्तर्गत पंजीकृत अधिष्ठान में कार्यरत हों तथा जिनका मासिक वेतन 10 हजार रुपये या उससे कम होगा।
उन्होंने बताया कि यदि कन्या के माता पिता दोनो ही प्रदेश में स्थित कारखानों में कार्यरत हैं तो दोनों का कुल मासिक वेतन 10 हजार रुपये अधिक नहीं होना चाहिये। कन्यादान की राशि उन्ही श्रमिकों की कन्याओं के लिये दी जायेगी जो किसी अधिष्ठान कारखाने मे कम से कम छह माह लगातार नियमित रुप से कार्यरत हों तथा आवेदनपत्र प्रस्तुत करने के समय भी कार्यरत हों।
योजना का लाभ श्रमिकों को उनके सम्पूर्ण सेवाकाल में केवल दो कन्याओं के विवाह के लिये दिया जायेगा। विवाह के समय कन्या की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिये। श्रमिकों को अपनी कन्या के विवाह की निर्धारित तिथि से एक माह पूर्व निर्धारित प्रपत्र पर आवेदन करना होगा। विवाह की तिथि के बाद प्राप्त होने वाले आवेदनों पर कोई विचार नहीं किया जायेगा।












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