अन्ना-रामदेव की जंग में फ्रंट संभालेंगे वीके सिंह!

सूत्रों ने बताया कि इस बाबत अंदरखाने तैयारियां शुरू भी हो गई हैं। जनरल को अन्ना और रामदेव के साथ मिलाने का काम जनरल के ही एक करीबी रिश्तेदान अरिदमन सिंह निभा रहे हैं। अरिदमन सिंह का इस परिवार से बहनोई का रिश्ता है। इसलिए उनके इस मुहिम को परिवार की सहमति मानी जा रही है। माना जा रहा है कि उनका परिवार चाहता है कि वीके सिंह सेना से रिटायर होने के बाद राजनीति में कूदे और भ्रष्टाचार के खिलाफ मुहिम छेड़ें।
सूत्र बता रहे हैं कि कोशिश की गई कि वीके सिंह अकेले मोर्चा खोलें पर आपसी सहमति के बाद यह तय किया गया कि उन्हें अकेले नहीं बल्कि बाबा रामदेव औऱ अन्ना हजारे के साथ मिलकर काम करना चाहिए जिससे लोगों का भी उन्हें भरपूर सहयोग मिल सके। एक सूत्र ने बताया कि अरिदमन सिंह को बाबा रामदेव का भी करीबी माना जाता है इसलिए कयास लगाया जा रहा है कि राजनीति में वीके सिंह को लाने का रोडमैप पहले से ही तैयार किया जा रहा था।
हालांकि इसका परीक्षण भी कर लिया गया और कुछ राजपूत साथियों के साथ अरिदमन सिंह ने दिल्ली के जंतर मंतर पर सेना बचाओ रैली निकलवायी थी जिसमें हरियाणा राजस्थान आदि से सैकड़ों राजपूतों और पूर्व सैनिकों ने अरिदमन का साथ देते हुए वीके सिंह की समर्थन की बात कही। हालांकि रैली में सैनिकों के कुछ ज्वलंत मुद्दों को भी उठाया गया था। अब देखना है कि 31 मई के बाद वीके सिंह किस प्रकार से भारतीय सियासत में इंट्री करते हैं।












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