भाजपा भी धीरे-धीरे प्रणब को मानने लगी राष्ट्रपति

प्राप्त जानकारी के अनुसार, संसद में वित्त बिल पर चर्चा के दौरान प्रणब का लालकृष्ण आडवाणी के साथ बैठना और उनसे खुलकर, हंसकर बातें करना औऱ उसके बाद यशवंत सिन्हा और सुषमा स्वराज द्वारा बयान दिया जाना न केवल प्रणब की दावेदारी पुष्ट कर रही थी बल्कि इसे सियासी समीकरण का हिस्सा माना जा रहा है। प्रणब ने वित्त विधेयक में काफी कुछ संशोधन कर दिया जिसके बाद भाजपा की तरफ से जब यशवंत सिन्हा बोलने के लिए खड़े हुए तो उन्होंने प्रणब की खूब तारीफ की।
यशवंत सिन्हा ने कहा, अगर आप बड़े घर यानी राष्ट्रपति भवन चले जाएं तब आज जो कुछ मैं कह रहा हूं, उसे मन में नहीं रखिएगा। आप शायद अगला बजट पेश नहीं करें, जाते- जाते करदाताओं को राहत प्रदान करते हुए आयकर में छूट की सीमा को तीन लाख रुपये कर दें। उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि भाजपा निजी तौर पर आपका सम्मान करती है और चाहती है कि आप किसी और भूमिका में लंबे समय तक देश की सेवा करते रहें।
सदन में मौजूद भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी और लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने भी सिन्हा की इस बात का समर्थन किया। सिन्हा के इस बयान के बाद जब आडवाणी से प्रणब की दावेदारी को लेकर पूछा गया तो उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि उन्हें एनडीए भी दावेदार बना सकता है। बहरहाल, भाजपा का मानना है कि इस मामले को इतना तूल दे दिया जाए कि कांग्रेस को मजबूर होकर प्रणब मुखर्जी का नाम आगे करना पड़े।











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