अमेरिका ने भी कहा- प्रणब दा को बनाओ राष्ट्रपति

प्रणव मुखर्जी कारपोरेट जगत के चहेते रहे हैं। उन्हें वित्त मंत्री बनवाने में भी कारपोरेट जगत और खासकर मुकेश अंबानी की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती रही है। प्रणव बोम्बे क्लब के अलावा विदेशी पूंजीपतियों और निवेशकों के पसंदीदा माने जाते हैं। देश में आर्थिक बदलाव के पक्षधर प्रणव पर विपछ में भी कोई विरोध नहीं हैं।
हर संकट में सरकार को उबारने के लिए मशहूर प्रणव मुखर्जी का विपक्ष के साथ हमेशा अच्छा रिश्ता रहा है। सरकार जब भी संकट फंसती रही है तब-तब प्रणब को आगे कर दिया जाता था। सिद्धांत के हिसाब से वामपंथियों को प्रणव मुखर्जी का विरोध करना चाहिए, लेकिन उनके साथ समस्या है कि अगर उन्होंने विरोध किया तो बंगाल में इसका असर पड़ेगा। पहली बार किसी बंगाली को राष्ट्रपति बनने का मौका मिल रहा है अगर वामपंथियों ने विरोध किया तो बंगाल की जनता में गलत मैसेज चला जाएगा।
हर देश की आंतरिक राजनीति में दखलंदाजी कर रहा अमेरिका ने भी प्रणव मुखर्जी के नाम को ओके कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक अमेरिका ने भारत सरकार को अपनी मंशा से अवगत करा दिया है। अमेरिका नहीं चाहता कि किसी भी हाल में भारत के सर्वोच्च पद कोई विवादस्पद व्यक्ति बैठे। इस हालात में उनका राष्ट्रपति बनना तय माना जा सकता है। भाजपा समेत ज्यादातर विपक्षी दल उनका शायद ही विरोध करें।
इस पद पर अनुभवी के साथ ऐसे व्यक्ति को लाना ठीक रहेगा जिसको देश के नहीं, बल्कि विदेश के लोग भी जानते हों। सभी उन्हें एक परिपक्व राजनेता और वित्तीय मामलों के जानकार के रूप में जानते हैं। शेयर बाजार की धारणा है कि अगर प्रणव राष्ट्रपति बनते हैं तो विदेशी निवेशकों के पास अच्छा मैसेज जाएगा कि भारत सही दिशा में आगे बढ़ रहा है।












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