यूपी के गांवों में नहीं शहरों में बढ़ रही है गरीबी

यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फार इंटरनेशनल डेवलपमेंट (यूएसएआईडी) की नेशनल फेमिली हेल्थ सर्वे की एक रिपोर्ट में के अनुसार ग्रामीण इलाकों में तो हालत जैसे थे उनमें अधिक अंतर नहीं आया लेकिन शहरी इलाकों की तस्वीर पूरी तरह से बदल चुकी है। आंकडों के मुताबिक पिछले दशक में शहरी इलाकों में गरीबी बढ़ी और आम लोगों को स्वास्थ्य सेवाओं का समुचित लाभ नहीं मिला। एनएचएफएस की रिपोर्ट के मुताबिक कानपुर, इलाहाबाद, आगरा व लखनऊ में हालात काफी खराब हैं।
औद्योगिक नगरी कानपुर में करीब 14.5 प्रतिशत लोग झुग्गी झोपड़ी में रहते हैं जबकि इलाहाबाद 12.72 प्रतिशत, वाराणसी में 12.54 प्रतिशत, आगरा में 9.67 प्रतिशत और लखनऊ 8.2 प्रतिशत लोग झुग्गी झोपडी में रहते हैं। शहरी जनसंख्या इस तेजी से बढ़ रही है कि नवजात शिशुओं को भी उचित स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। आंकड़ों के मुताबिक दस में से एक बच्चे को बेहतर चिकित्सा सुविधा नही मिल पा रही है जिसकी वजह से वह अपना पांचवा जन्मदिन नहीं देख पाता।
अर्थात पांच वर्ष की उम्र तक पहुंचते-पहुंचते उसकी मौत हो जाती है। प्रदेश में मात्र 16.3 प्रतिशत नवजात शिशुओं को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल पा रही है जबकि 15.3 प्रतिशत शिशुओं को पूरी तरह टीकाकरण का लाभ भी नही मिल पा रहा है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि राज्य सरकार इन लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है। विभिन्न संस्थाओं द्वारा बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए कई योजनाएं बनायी गयी हैं। इन योजनाओं को राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के जरिए भी अमलीजामा पहनाया जा रहा है।












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