गांव में घुसे बाघ को पकडऩे में लगे 110 दिन

Tiger
लखनऊ। लम्बी चौड़ी पुलिस फोर्स और ढेरों वन विभाग के कर्मचारी होने के बाद भी एक बाघ को पकडऩे में अधिकारियों को 110 दिन लग गए। लखनऊ से सटे काकोरी के रहमान खेड़ा में घुसे बाघ को पकडऩे के लिए कई विशेषज्ञों को तैनात किया गया था लेकिन कामयाबी बुधवार को मिली।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के काकोरी और उसके आसपास आतंक का पर्याय बन चुके बाघ को बुधवार को वन विभाग के अधिकारियों ने पकड़ ही लिया। ज्ञात हो कि बाघ को पकडऩे के लिए कई राज्यों से विशेषज्ञ बुलाए गए थे जो बाघ को पकडऩे में नाकामयाब रहे। आखिरकार रहमानखेड़ा क्षेत्र से वन विभाग की टीम ने उसे भोर में चार बजे ट्रंककुलाइजर से बेहोश कर पकड़ा।

हैदराबाद, दिल्‍ली से आयीं टीमें

क्षेत्रीय वनाधिकारी अशोक कुमार के अनुसार बाघ ने कल एक भैंस को मार दिया था। उसने कल भी उसे खाया था और बुधवार को तड़के भी खाने आया था। पहले से ही ताक लगाये बैठी वन विभाग की टीम ने उसे ट्रंककुलाइज कर बेहोश कर दिया।

अशोक कुमार ने बताया कि उसे पकड़ कर दुधवा नेशनल पार्क लखीमपुर खीरी भेज दिया गया। बाघ को इस क्षेत्र में सबसे पहले गत पांच जनवरी को देखा गया था। बाघ के डर से लोग शाम होते ही घरों में दुबक जाते थे। आम पट्टी मलिहाबाद के किसानों ने अपने बागों में अकेले जाना छोड़ दिया था।

बाघ ने हालांकि किसी व्यक्ति को न तो मारा नहीं घायल किया लेकिन उसने कम से कम 20 जानवरों को अपना निवाला जरूर बनाया। उसे पकडऩे के लिये आन्ध्रप्रदेश के हैदराबाद, देहरादून, दिल्ली और कुछ अन्य स्थानों के विशेषज्ञ बुलाये गये थे। उसे पकडऩे में लाखों रूपये खर्च हो गये। उसे पकडऩे के लिये हाथियों का भी प्रयोग किया गया था। बाघ के पकड़े जाने से आसपास के निवासियों ने राहत की सांस ली है।

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