यूपी में लोकायुक्त के दायरे में नहीं होंगे सीएम

एक ओर दिल्ली में बैठकर अन्ना हजारे लोकायुक्त को और मजबूत किए जाने की मांग करते हैं तो समाजवादी पार्टी अन्ना हजारे का समर्थन करती है लेकिन यूपी में जब सीएम की कुर्सी को लोकायुक्त के दायरे में लाने की बात हुई तो सपा सरकार इससे पीछे हट गयी। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने खुद ही इस बात से इनकार कर दिया कि सीएम को लोकायुक्त के दायरे में रखा जाए।
गौरतलब है कि पिछले 15 मार्च को लोकायुक्त एन.के.मेहरोत्रा का कार्यकाल दो साल बढ़ाया गया था। श्री मेहरोत्रा ने लोकायुक्त संगठन को और ज्यादा ताकत प्रदान करने के लिये गत 24 मार्च को मुख्यमंत्री के खिलाफ जांच का दायरा बढ़ाने का आग्रह किया। श्री मेहरोत्रा ने प्रस्ताव में इसके अलावा विश्वविद्यालयों और कालेजों की संपत्ति की जांच के अलावा ग्राम प्रधान तथा स्वयं सेवी संस्थाओं को भी जांच के दायरे में लाने का प्रस्ताव दिया था। श्री यादव ने आज साफ कर दिया कि मुख्यमंत्री को लोकायुक्त के जांच के दायरे में लाने के पक्ष में सरकार नहीं है।
अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार लोकायुक्त संगठन को मजबूत करना चाहती है लेकिन मुख्यमंत्री को जांच के दायरे में शामिल करने के पक्ष में नहीं हैं। ज्ञात हो कि बिहार, केरल व उत्तराखंड जैसे राज्यों में लोकायुक्त को मुख्यमत्रीं के भी खिलाफ भ्रष्टाचार मामले की जांच का अधिकार है लेकिन यूपी सरकार ने ऐसा करने से मना कर दिया।
अखिलेश यादव ने कहा कि राज्य सरकार के पास लोकायुक्त संगठन में फेरबदल का प्रस्ताव विचाराधीन है। सपा ने विधानसभा के चुनावी घोषणा पत्र में लोकायुक्त संगठन को ज्यादा धारदार बनाने का वायदा किया था। श्री मेहरोत्रा बहुजन समाज पार्टी सरकार के मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के बाद कार्रवाई की सिफारिश को लेकर चर्चा में आये थे। मुख्यमंत्री ने उनकी सिफारिश पर लोक निर्माण मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी को छोड़ करीब एक दर्जन मंत्रियों को निलंबित किया गया था।












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