ममता बनर्जी की मांगों को मान लेगी सरकार

दिल्ली में चर्चा है कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के अल्टीमेटम से सरकार डर गई है हालांकि ममता ने इसे अल्टीमेटम का नाम देने पर मीडिया पर बरसी भीं। उन्होंने कहा कि उन्होंने केंद्र को कोई अल्टीमेटम नहीं दिया है बल्कि केंद्र से उन्होंने आग्रह किया है कि वह उनके मुद्दों पर गंभीरता से विचार करे जिससे राज्य को तरक्की के रास्ते पर ले जाया जा सके।
हालांकि अंदर ही अंदर सहमी केंद्र सरकार बजट सत्र के दौरान आने वाले अहम वित्त विधेयक से पहले ही उन्हें शांत करने की कोशिशों में जुट गई है। एनसीटीसी पर बैठक से एक दिन पहले 4 मई को प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ममता के साथ उनकी मांगों पर चर्चा करेंगे। माना जा रहा है कि ममता को कुछ रियायतें दी जा सकती हैं। पिछले कुछ संसदीय सत्रों में ममता का उग्र तेवर देख चुकी कांग्रेस अभी से सतर्क हो गई है।
केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने भी कहा कि ममता महत्वपूर्ण सहयोगी हैं। उनकी हर बातें सुनी जाएंगी और सामंजस्य बिठाने की कोशिश होगी। इसी क्रम में सप्ताह में होने वाली तीन बैठकों में अलग अलग मंत्रियों को भी बुलाया जाएगा ताकि सहयोगियों की मांगों पर ध्यान दिया जा सके। गौरतलब है कि ममता ने राज्य की ऋण पर ब्याज की अदायगी में तीन साल तक रोक लगाने की मांग की थी। पंद्रह दिन का अल्टीमेटम देते हुए उन्होंने आगाह किया था कि उनकी मांग पूरी नहीं हुई तो आगे की कार्रवाई पर विचार किया जाएगा।












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