बंद हो सकते हैं मायावती के प्रोजेक्ट

बसपा शासन काल में कई योजनाएं चली लेकिन सरकार बदलने के बाद अब उन योजनाओं पर काम ठप हो गया है। हालांकि सपा सरकार के अधिकारी इस मामले में कुछ बोल नहीं रहे, लेकिन मायावती के प्रोजेक्टों का बंद होना साबित करता है कि राजनीति विद्वेष की भावना से ऐसा किया जा रहा है।
ज्ञात हो कि मायावती के कार्यकाल में ग्राम्य विकास विभाग में महामाया आवास योजना और महामाया सर्वजन आवास योजना, कांशीराम आवास योजना, कांशीराम शहरी समग्र विकास जैसी योजनाएं चलीं। इसके अतिरिक्त अम्बेडकर ग्राम विकास योजना भी शुरू की गयी थी, जिसके तहत अम्बेडकर ग्राम घोषित किए गए गांवों को सभी सुविधाओं से लैस किया जाना था यह बात और है कि गावों को चमकाने के नाम पर ठेकेदारों ने जमकर लूट की।
प्रदेश में सरकार बदलने के बाद अब ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि इन योजनाओं को बंद किया जा सकता है या फिर इन योजनाओं को जारी होने वाली धनराशि रोकी जा सकती है। फिलहाल कई योजनाओं पर काम बंद भी हो गया है। मायावती ने वर्ष 2007-08 में इंदिरा आवास योजना की तर्ज पर ही महामाया आवास योजना शुरू की इस योजना में केवल अनुसूचित जाति तथा जनजाति के गरीब परिवारों को आवास दिया जाना था।
वर्ष 2008-09 में महामाया सर्वजन आवास योजना की शुरुआत की थी जिसके तहत गैर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जाति के लोगों को इसका लाभ दिया गया। योजना के तहत लाभार्थी को 45 हजार रुपये में आवास दिया गया। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या सपा सरकार पूर्ववर्ती बसपा सरकार की मुखिया के नाम पर चलायी जा रही योजनाओं का प्रचार कराएगी या नहीं।
फिलहाल ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि इन योजनाओं आने वाले कुछ दनों में बंद किया जा सकता है। ग्राम्य विकास विभाग अधिकारी कहते हैं कि गरीबों को आवास उपलब्ध कराने के लिए पहले से ही इंदिरा आवास योजना की व्यवस्था है ऐसे में सपा सरकार महामाया योजना में पैसा लगाएगी ऐसा कम ही लगता है। संभावना है कि सरकार योजनाओं का नाम बदलकर नयी योजना लागू कर दे।












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