कर्नाटक और केरल में फिक्स फोन का जलवा

फोन की दुनिया में विलुप्त हो रही लैंडलाइन सेवा का अभी भी कई जगह दबदबा कायम है। केरल में टेलीफोन की ट्रिन-ट्रिन सबसे ज्यादा घनघनाती है। वहीं मुंबई, दिल्ली, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसी कई जगहों में भी लैंडलाइन टेलीफोन सेवा को तवज्जो देने वालों की कमी नहीं है। खास बात यह है कि इन राज्यों में सबसे ज्यादा लैंडलाइन सेवाएं सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी बीएसएनएल और एमटीएनएल की है।
निजी क्षेत्र की कंपनियों के लैंडलाइन फोन सेवाओं को इस्तेमाल करने वाले अभी कम हैं। इसीलिए बीएसएनएल और एमटीएनएल लैंडलाइन फोन कारोबार में ज्यादा निवेश कर रहे हैं। बीएसएनएल ने हाल ही में लैंडलाइन ग्राहकों की शिकायतों के निपटारे के लिए विशेष कॉल सेंटर सुविधा शुरू की है। टेलीकॉम विशेषज्ञ अनूप कुमार कहते हैं कि बेहतर लैंडलाइन फोन सेवाओं की दिशा में मजबूत फोन संचार ढांचे का होना जरूरी है। केरल जैसे प्रदेश में सबसे ज्यादा लैंडलाइन ग्राहक यूं ही नहीं है। दरअसल, वहां ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क का जाल इतना सघन है कि मोबाइल फोन नेटवर्क के जाल को भी मात दे देता है।
केरल में 32 लाख लैंडलाइन फोन ग्राहक है। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण यानी ट्राई के आंकड़ों के मुताबिक मुंबई में 30 लाख, दिल्ली में 28 लाख और कर्नाटक में 27 लाख मोबाइल फोन ग्राहक है। इसके बाद कर्नाटक (26 लाख), महाराष्ट्र (23 लाख), अंाध्रप्रदेश, तमिलनाडु (21 लाख), गुजरात (18 लाख), पंजाब (14 लाख) और पूर्वी उत्तर प्रदेश (13 लाख) का नंबर है। भले ही इन जगहों में लैंडलाइन फोन सबसे ज्यादा हों लेकिन यहां इसके ग्राहक तेजी से घट रहे हैं। मोबाइल फोन को अपनाने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि आए दिन लैंडलाइन फोन सेवाओं में खराबी भी इसके ग्राहकों में कटौती का प्रमुख कारण है। सस्ती मोबाइल फोन सेवा भी एक बड़ा कारण है जो ग्राहकों को आकर्षित करता हैं।












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