आर्मी चीफ रिश्वत मामले में भाजपा ने पीएम से मांगा स्पष्टीकरण

भाजपा के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह ने संवाददाताओं से कहा कि प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री दोनों की कार्यशैली चुप्पी साधने और अनिर्णय की है। इसका खामियाजा देश भुगत रहा है और आगे भी भुगतना पड़ेगा। किसी भी विषय पर निर्णय करना रक्षा मंत्री के लिए दूभर परीक्षा होती है। रक्षा मंत्रालय जैसे महत्वपूर्ण विभाग इस तरह से नहीं चल सकते क्योंकि इससे फौज का मनोबल प्रभावित होता है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि रक्षा मंत्रालय और सेना के तीनों अंगों के बीच पारस्परिक सद्भावना और विश्वास टूट गया है या समाप्त हो गया है।
भाजपा नेता ने कहा, प्रधानमंत्री और रक्षा मंत्री को देश को विश्वास में लेना चाहिए। रक्षा मंत्री को संसद में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। अनिर्णय और टालने का रवैया छोड़ना चाहिए। यह पूछे जाने पर कि क्या सेना प्रमुख का मीडिया के समक्ष जाने का कदम उचित था, जसवंत ने कहा, मुझे इससे निराशा हुई है। लेकिन मैं यह जनना चाहता हूं कि क्या उनका (सेना प्रमुख) मीडिया में जाने के पीछे रक्षा मंत्री के अनिर्णय के बाद निराशा का परिचायक तो नहीं है। जसवंत सिंह ने सवाल किया कि रक्षा मंत्री ने इसकी जानकारी मिलने पर कार्रवाई क्यों नहीं की।
क्या रक्षा मंत्री की प्रतिक्रिया कमजोर और अप्रभावी रही। उन्होंने कहा कि सेना प्रमुख ने भी मिलिट्री पुलिस से रिश्वत की पेशकश करने वाले व्यक्ति को गिरफ्तार करने के लिए क्यों नहीं कहा। जसवंत ने कहा कि रक्षामंत्री को सेना के वाहनों, उसके विक्रेताओं और रखरखाव सुविधाओं का पूरा ब्यौरा देना चाहिए। उन्होंने कहा, देश में फौज को सैन्य साजोसामान विशेष तौर पर तोपखाने की कमी का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन वर्षो से अनिर्णय की स्थिति के कारण इसे दूर नहीं किया जा सका है। भाजपा नेता ने कहा कि भारतीय वायुसेना के लिए 126 लड़ाकू विमानों की खरीद में रक्षा मंत्री के अनिर्णय के कारण काफी देरी हुई।
उन्होंने कहा कि राजग के शासनकाल में निर्णय किया गया था कि रक्षा सौदों से संबंधित जितने भी बिचौलिये या एजेंट हैं, उनका पंजीकरण कराया जाए और उत्पादक यह बतायें कि उनका एजेंट कौन है और कितनी दलाली दी जा रही है। इस विषय को आगे बढ़ाया जाना चाहिए। मनोनीत सेना प्रमुख जनरल विक्रम सिंह के समक्ष उत्पन्न चुनौतियों के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि जनरल विक्रम सिंह शानदार अधिकारी हैं। लेकिन यह विक्रम सिंह का सवाल नहीं बल्कि राष्ट्रीय समस्या है।












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