छत्तीसगढ़: विधानसभा घेरने जा रहे आदिवासियों पर लाठीचार्ज

Chhattisgarh
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में अपनी मांगों को लेकर विधानसभा का घेराव करने जा रहे आदिवासियों और पुलिस के बीच झड़प के बाद पुलिस ने आदिवासियों को दौड़ाकर पीटा है। वहीं इस घटना के बाद राज्य के मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने रमन सरकार से इस्तीफा मांगा है। रायपुर जिले के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लाल उम्मेद सिंह ने बताया कि 32 प्रतिशत आरक्षण समेत अन्य मांगों को लेकर आज विधानसभा घेरने जा रहे आदिवासियों ने शहर के सिद्धार्थ चौक पर पुलिस पर हमला कर दिया जिसके बाद बल प्रयोग करना पड़ा।

श्री सिंह ने बताया कि अपनी मांगों को लेकर लगभग चार हजार आदिवासी आज सिद्धार्थ चौक पर एकत्र हुए थे। यहां से उन्हें गिरफ्तार किया जाना था। लेकिन अचानक आंदोलनकारी आदिवासियों ने आगे बढ़ने की कोशिश की और जब उन्हें रोका गया तब उन्होंने पुलिस पर पथराव कर दिया। इस घटना में कुछ पुलिस कर्मी घायल हो गए। बाद में आंदालनकारियों को रोकने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए और लाठी लहराकर खदेड़ा गया। पुलिस अधिकारी ने बताया कि इस घटना के बाद लगभग एक हजार आदिवासियों को गिरफ्तार कर रिहा किया गया तथा जबकि पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविंद नेताम, आदिवासी नेता गुलाब सिंह और मनोज मंडावी समेत एक दर्जन नेताओं को जेल भेज दिया गया है।

इधर आदिवासियों पर लाठी चार्ज की घटना के बाद कांग्रेस ने इसकी निंदा की है और सरकार से इस्तीफा मांगा है। छत्‍तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष नंदकुमार पटेल ने कहा है कि अपनी मांगों को लेकर प्रजातांत्रिक तरीके से विधानसभा का घेराव करने जा रहे आदिवासियों पर बर्बरतापूर्वक लाठी चार्ज करने और उनको दौड़ा-दौड़ाकर मारने से भाजपा सरकार का आदिवासी विरोधी चेहरा उजागर हुआ है इससे उनकी कथनी और करनी में अन्तर स्पष्ट दिखता है आदिवासी समाज को अपने जायज अधिकारों की मांग के लिए सड़क पर उतरना पड़ रहा है और उन्हें क्रूरतापूर्वक पुलिस अत्याचार का शिकार बनना पड़ रहा है, इससे ज्यादा दुखद और कुछ नहीं हो सकता है।

इधर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी ने कहा है कि विधानसभा का शांतिपूर्वक घेराव करने जा रहे हजारों सर्वआदिवासी समाज के लोगों पर बर्बर लाठी चार्ज, पानी की बौछारें, अश्रु गैस के गोले एवं गिरफ्तार करने की घटना ने यह सिद्ध कर दिया है कि प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा आदिवासी समाज की जायज मांगों को नजरअंदाज किया जा रहा है। आदिवासी समाज रमन सरकार में उपेक्षा का शिकार है तथा उनकी जायज मांगों की अनदेखी कर रमन सरकार प्रदेश में आदिवासियों के मौलिक अधिकारों का हनन कर रही है तथा संविधान में प्रदा अधिकारों को बल के माध्यम से कुचला जा रहा है।

आदिवासियों के दम पर बनी प्रदेश की भाजपा सरकार के पास उनकी जायज मांगों को सुनने तक का समय नहीं है। जोगी ने कहा है कि आदिवासी समाज के शांतिपूर्ण निकाले गए जुलूस पर पुलिस द्वारा लाठी चार्ज कर उन्हें गंभीर चोटें पहुंचाई गई। पानी की बौछार का प्रयोग कर आदिवासियों के जूलूस को तितर-बितर किया गया तथा इतने पर भी आदिवासी के हौसले कम न होते देखकर इशारे पर बर्बर लाठी चार्ज किया गया और दौड़ा-दौड़ा कर महिलाओं, बच्‍चों एवं बुजुर्गों पर भी लाठियां बरसाई गई है। पूर्व मुख्यमंत्री ने सर्व आदिवासी समाज की जायज मांगों का समर्थन किया है तथा आदिवासी जूलूस पर पुलिस द्वारा किये गये लाठी चार्ज की उच्‍च स्तरीय जांच की मांग की है।

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