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शहला हत्‍याकांड: तीसरा और आखिरी शूटर कानपुर से गिरफ्तार

Ssocial Activist Shehla Masood
कानपुर। भोपाल की आरटीआई कार्यकर्ता शहला मसूद हत्याकांड मामले में कानपुर से गिरफ्तार किये गये आरोपी इरफान के सहयोगी माने जाने वाले ताबिश को आज सुबह यूपी एसटीएफ की टीम ने गिरफ्तार किया है। यूपी एसटीएफ के क्षेत्राधिकारी त्रिवेणी सिंह ने बताया कि शहला हत्याकांड में जांच के दौरान गिरफ्तार किये इरफान से पूछताछ के बाद आज तड़के इरफान के दोस्त ताबिश को बेकनगंज स्थित उसके घर के पास से गिरफ्तार किया गया। ताबिश को एसटीएफ की टीम लखनऊ लेकर जा रही है जहां उससे विस्तृत पूछताछ होगी।

उन्होंने बताया कि इससे पहले कल रात एसटीएफ की टीम ने ताबिश के तलाक महल स्थित घर पर छापा मारा था, जहां उसकी पत्नी, बच्चे और उसका छोटा भाई दानिश मिला था। दानिश को एसटीएफ की टीम कोतवाली ले आई थी, जहां पूछताछ में उसने ताबिश के छिपने का ठिकाना बता दिया, जिसके आधार पर आज सुबह करीब पांच बजे ताबिश को एसटीएफ की टीम ने गिरफ्तार कर लिया। अब उसे लेकर लखनऊ ले जाया जा रहा है, जहां उससे सीबीआई की टीम पूछताछ करेगी और बाद में उसे अदालत में पेश किया जायेगा।

एसटीएफ सूत्रों ने बताया कि शहला मसूद हत्याकांड में पहले पकड़े गये इरफान से पूछताछ के दौरान पता चला था कि ताबिश इरफान का दोस्त है और उसके पिता मतीन भी पुराने जमाने के हिस्ट्रीशीटर रहे हैं। जानकारी मिली थी कि इरफान को हथियारों की आपूर्ति ताबिश ही करता था। एसटीएफ सूत्रों ने बताया कि कल देर रात तक ताबिश की तलाश में मतीन के घर की तलाशी ली गयी थी, लेकिन वहां ताबिश नहीं मिला था।

गौरतलब है कि 27 फरवरी की देर रात शहला मसूद हत्याकांड में शामिल इरफान को बेकनगंज के तलाक महल इलाके से यूपी एसटीएफ की टीम ने गिरफ्तार किया था और बेकनगंज थाने में उसके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गयी थी। गिरफ्तारी के समय उसके पास से एसटीएफ को एक देशी पिस्तौल और कारतूस भी मिले थे। इरफान अपराधी प्रवृत्ति का था और उसके खिलाफ बेकनगंज पुलिस स्टेशन में आईपीसी की धारा 307, 332, 353 तथा एनडीपीएस एक्ट, एक्साइज एक्ट तथा गैंगस्टर जैसे आधा दर्जन से अधिक मुकदमें दर्ज है और वह कई बार जेल जा चुका है।

इरफान ने पूछताछ में बताया था कि उसके साथ शहला हत्याकांड में शहर का शानू ओलंगा और सलीम भी शामिल था। इस हत्याकांड की सुपारी शानू ओलंगा को भोपाल में किसी ने दी थी। शानू के कहने पर वह और सलीम 10 अगस्त को भोपाल पहुंचे थे। इस काम के लिये तीन लाख रूपये दिये जाने की बात कही थी, लेकिन केवल दो लाख रूपये ही दिये गये बाकी रकम बाद में देने को कहा गया था।

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