वाह प्रणब बाबू आम बजट से 'आम' को ही गायब कर दिया

समझ में नहीं आता यह बजट किसके लिए पेश हुआ है? ना तो बच्चों, ना तो महिलाओं, ना तो छात्राओ, ना तो कामकाजी मांओ, ना तो बुजुर्गों के लिए उस बजट में कुछ है।
अब आप ही बताइये कि यह बजट प्रणब मुखर्जी ने किसके लिए पेश किया है। यह बजट तो सीधे महंगाई बढ़ायेगा। बजट तो सीधे आम आदमी की जेब पर सीधे मार कर रहा है।
महंगाई की मार सहने वाली जनता के लिए यह एकदम असहनीय है। मुझे आज बहुत निराशा हुई है लेकिन अब मैं समझता हूं कि सरकार का भी यह आखिरी बजट है, उसे समझ में आ गया है कि जनता उसे वापस लाने वाली नहीं है। पूरा देश इस समय त्राही-त्राही कर रहा है। सरकार आंख मूंदे बैठी है जो वाकई पीड़ादायक है।












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