मतों के ध्रुवीकरण के कारण हारी भाजपा

हार पर मंथन करने के बाद पार्टी ने जांच के लिए एक कमेटी का गठन किया गया है जो विस्तृत जांच कर अपनी रिपोर्ट जल्द ही सौंपेगी। शाही ने बताया कि हार के कारणों की समीक्षा के लिए बैठक आयोजित की गई थी जिसमें भाजपा विधानमण्डल दल के पूर्व अध्यक्ष ओमप्रकाश सिंह, महामंत्री नरेन्द्र सिंह, पार्टी की वरिष्ठ नेता तृप्ति शाक्य डा. महेन्द्र सिंह समेत प्रदेश के कई पदाधिकारी मौजूद थे।
उन्होंने बताया कि 31 मार्च के पहले सभी जिलों में बैठक कर विधानसभा हार की समीक्षा की जाएगी। उनका कहना था कि पार्टी ने कम से कम 100 सीटों की अपेक्षा की थी लेकिन मतों के ध्रुवीकरण के कारण पार्टी को शिकस्त खानी पड़ी। शाही ने कहा कि विधानसभा चुनाव में हार के बाद अभी पार्टी के हौसले पस्त नहीं हुए हैं। पार्टी ने आगामी निकाय चुनाव को पूरी मुस्तैदी के साथ लडऩे का निर्णय लिया गया है। नगर निगम चुनाव की तैयारियों के लिए बनी तीन सदस्यीय कमेटी में लखनऊ के पूर्व मेयर डा. दिनेश शर्मा, दमयन्ती गोयल और कौशलेन्द्र सिंह शामिल हैं जबकि नगरपालिका परिषद चुनाव की तैयारियों के लिए बनी दो सदस्यीय समिति के प्रमुख विधायक सुरेश खन्ना हैं।
शाही ने बताया कि पांच सीटों पर पार्टी की हार पांच सौ से कम मतों से हुई है जबकि सात सीटों पर पांच हजार से कम वोटों से हारे हैं। बहुचर्चित एनआरएचएम घोटाले में जेल में बंद पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा को पार्टी में शामिल किये जाने की वजह से मतदाताओं पर पार्टी के प्रति विपरीत प्रभाव पडऩे संबंधी सवाल का उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया और कहा कि कमेटी बिन्दुवार समीक्षा करेगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस और सपा चुनाव के दौरान एक-दूसरे से लड़ते रहे लेकिन अब दोनों एक हो गए हैं और यह उत्तर प्रदेश के लिए चिन्ता का विषय है।












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