ममता ने रोकी यूपीए की रेल तो मुलायम देंगे हरी झंडी!

रेल बजट पेश करते वक्त केंद्रीय मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने जैसे जी सिग्नल तोड़ा, वैसे ही तृणमूल कांग्रेस की चीफ ममता बनर्जी ने चेन पुलिंग कर दी। चेन पुलिंग के तुरंत बाद ऐसा वैक्यूम ब्रेक लगा कि यूपीए के कुछ डिब्बे पटरी से उतरते दिखाई देने लगे। खबर आयी कि मनमोहन की रेल अगले ही स्टेशन पर डी-रेल हो जायेगी। लेकिन अचानक प्रणब मुखर्जी ने बयान दिया कि ट्रैक की सारी फिश प्लेट ठीक तरह से लगी हुई हैं, लिहाजा रेल यानी सरकार को कोई खतरा नहीं है।
सवाल यह उठता है कि क्या यूपीए सरकार ममता की झिड़कियां सुनने की आदि हो चुकी है, या फिर उसने रास्ता खोजना शुरू कर दिया है। वैसे सही मायने में देखें तो सोनिया गांधी ने रास्ता खोजना शुरू कर दिया है। और यह रास्ता मुलायम सिंह के घर से होते हुए निकलता है।
जी हां यूपीए सरकार की जिस ट्रेन को ममता बनर्जी ने रोक दिया है, वह अब मुलायम सिंह की हरी झंडी के बाद ही चलेगी। वो ऐसे कि ममता बनर्जी के पास कुल 19 सांसद हैं, जिनके साथ वो यूपीए में कैबिनेट स्तर तक सक्रिय हैं। वहीं मुलायम अपने 23 सांसदों के साथ यूपीए को बाहरी समर्थन दे रहे हैं। अब रोज रोज ममता की झिड़कियों से निजात पानी है तो सोनिया को ममता बनर्जी से दोस्ती तोड़नी पड़ेगी। ऐसा करने से पहले वो मुलायम का हाथ थामेंगी।
यूपीए की रेल के टीटी मुलायम ही क्यों
आप सोच रहे होंगे कि जब यूपी की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती के पास जब 20 सांसद हैं, तो कांग्रेस उनके पास भी जा सकती है, आखिर वो मुलायम के पास ही क्यों जायेगी। उसका सीधा जवाब आम चुनाव 2014 है। सोनिया गांधी अच्छी तरह जानती हैं कि अगर मुलायम को यूपीए के अंदर शामिल कर लिया जाये तो यूपी से अगले लोकसभा चुनाव में अच्छी संख्या में सीटें जीती जा सकती हैं। ऐसा इसलिए भी क्योंकि इस समय यूपी में सिर्फ सपा का बोलबाला है।
चूंकि बुरी तरह हार के साथ माया के जाने के बाद बसपा की किरकिरी हो चुकी है, लिहाजा कांग्रेस उसका हाथ थामना पसंद नहीं करेगी। एक अन्य कारण यह भी कि राज्य की सत्ता बेटे अखिलेश को थमाने के बाद मुलायम अब यूपी में पूरी तरह फ्री हैं। अब वो केंद्र में कोई भी विभाग आसानी से संभाल सकते हैं।












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