प्रवासियों का स्‍वागत नरेंद्र मोदी की स्‍टाइल में!

Narendra Modi
किशोर त्रिवेदी

पने संसदीय क्षेत्र में खोई हुई राजनीतिक जमीन को वापस पाने के लिए किसी भी राजनेता के लिए काफी आसान होता है कि वो अपनी 'मिट्टी के पुत्र' की भूमिका में आये और फिर छा जाये। बराक ओबामा के कार्यकाल में प्रवास-विरोधी अभियान आये दिन चलाये जाने लगे हैं। यूके में 2012 से प्रधानमंत्री बनने के बाद से कैमरून प्रवासियों के सख्‍त खिलाफ हैं। इस सूची में निकोलस सरकोजी सबसे ऊपर हैं, जिन्‍होंने राष्‍ट्रपति चुनाव के दौरान ख्‍याति प्राप्‍त करने के लिए एक बहुत ही सख्‍त कदम उठाया, जो विदेशी प्रवासियों के खिलाफ था। घर की ओर बढ़ें तो भारत के कई भागों में 'मिट्टी के पुत्र' के नाम पर काफी खून बह चुका है। कश्‍मीर में भारतीयों को जमीन खरीदने की इजाजत नहीं है, पंजाब की समस्‍या, शिवसेना, मनसे और यह सूची बढ़ती जाती है।

लेकिन यहां पर एक अपवाद है, जिसमें एक विश्‍व जहां प्रवासी के खिलाफ नकारात्‍मक रवैये की खिलाफत की जाती है। वो है गुजरात, जिसने सिर्फ प्रवासियों का स्‍वागत नहीं किया, बल्कि उनके लिए बाहें खोल दीं और उन्‍हें सुरक्षक्षा और समृद्धि प्रदान की।

कुछ दिन पहले नरेंद्र मोदी ने सूरत में उत्‍तर भारतीय प्रवासियों की एक सभा में एक बेहतरीन भाषण दिया। कार्यक्रम था होली मिलन समारोह और ज्‍यादातर श्रोता उत्‍तर भारत के लोग थे। पूरे कार्यक्रम में उत्‍साह का माहौल था, मैदान खचा-खच भरा हुआ था। मोदी को सुनने के लिए लोग मैदान के बाहर से देख रहे थे। उन्‍होंने जो बात उठाई वो थी प्रवासियों, स्‍थानीय लोगों और राज्‍य के चौतरफा विकास की थीं। जहां लोग अपराध, नकारात्‍मक सोच और हिंसा को आधार बनाकर प्रवासियों से दूर भागते हैं वहीं नरेंद्र मोदी ने कहा- कोई भी कभी भी गुजरात आ सकता है और अपना एक नया जीवन शुरू कर सकता है, वो भी शांत वातावरण, सुरक्षा और विश्‍वास के बीच। बहुत से लोगों ने उनकी सोच को अलग समझा व सराहना की।

मोदी ने यह भी कहा कि प्रवासी गुजरात के असली एम्‍बेस्‍डर्स हैं। जब वो लोग अपने गृह राज्‍य में जाते हैं तो गुजरात में बेहतरीन जीवन के साथ, जीवन की गुणवत्‍ता से तुलना करते हैं। संदेश यही पहुंचता है कि यदि गुजरात का विकास होगा तो अभी से आगे की लाइफ क्‍ि‍लयर होती दिखाई दे रही है। उनका मानना है कि विकास में प्रवासियों की भूमिका अहम होती है।

नरेंद्र मोदी की यह सोच काफी महत्‍वपूर्ण साबित हुई और खुलकर रंग लायी। लोग कहते हैं कि मोदी लहरों के खिलाफ तैरते हैं। उन्‍होंने इतना बड़ा और व्‍यापक कदम उठाया। इसमें कोई शक नहीं कि प्रवासियों में गजब का आवेग होता है राज्‍य का विकास करने के लिए। मुंबई और दिल्‍ली की ओर देखिये। लेकिन यहां पर हलका सा राजनीतिक उथल-पुथल भी है। लोग तुच्‍छ राजनीति के दम पर लोगों को भड़काते हैं। लेकिन गुजरात में पिछले तीन सालों में कुछ अलग ही हुआ है।

मोदी ने यह भी कहा था कि यह समय है राष्‍ट्र के विकास के बारे में सोचने का, न कि विकास का बंटवारा करने का। "गुजरात जितना मेरा है उतना ही आपका है।" उन्‍होंने यह घोषणा की । जब बात राष्‍ट्र की हो रही हो तो ऐसे मुद्दों को पीछे धकेल दिया जाना चाहिये। जब लोग संपूर्ण विकास के बारे में सोचते हैं तो उनके मन में तमिललिन आता है। उसके बाद कर्नाटक के लोग और फिर भारतीय। ठाकरे बंधु मुंबई के बारे में पहले सोचते हैं कोंकण के बार में बाद में, महाराष्‍ट्र तीसरे स्‍थान पर रहता है और राष्‍ट्र चौथे पर। बतौर रेल मंत्री ममता बनर्जी ने बंगाल के बारे में पहले सोचा। यहां दूसरा कोई स्‍थान ही नहीं था। नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि बाकियों से हमेशा अलग हैं। उनके लिए भारत पहले है। वो कहते हैं, अब यह "मैं" हूं, लेकिन सिर्फ "हम" ही भारत को आगे ले जा सकते हैं।

अपनी बात रखने के लिए केस स्‍टडी में सूरत को अपने स्‍थान के रूप में चुनते वक्‍त मोदी ने एक यह बात रखी, क्‍योंकि अगर आप सूरत जायेंगे तो देखेंगे कि यहां सिर्फ नेतृत्‍व पैदा होता है। यहां लोग सहयोग पूर्वक रह रहे हैं और लोगों को सरकार का भरपूर सहयोग मिलता है।

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