स्थानीय निकाय चुनाव नहीं लड़ेगी बसपा

मायावती ने कहा कि यदि संगठन का कोई कार्यकर्ता या पदाधिकारी ऐसे चुनाव में भाग लेगा तो उसे निलंबित कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि सपा की सरकार में स्थानीय निकाय के स्वतंत्र व निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं हैं इसलिए बसपा यह चुनाव नहीं लड़ेगी। उन्होंने पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं को पार्टी का जनाधार बढ़ाने की हिदायत दी।
बसपा अध्यक्ष ने कहा कि सपा में विकास एवं कानून व्यवस्था के मुद्दे पर इच्छाशक्ति का घोर अभाव है, उसकी इस संबंध में न कोई नीति है और न ही कोई नीयत। उन्होंने कहा कि मध्यावधि चुनाव की संभावना काफी हद तक सही लगती है। मायावती का कहना है कि ऐसा राजनीतिक माहौल बन रहा है जिससे लगता है कि लोकसभा का चुनाव वर्ष 2014 से काफी पहले हो जाएगा।
इसके लिए अभी से तैयार रहना होगा। मायावती ने देश में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी एवं भ्रष्टाचार पर प्रहार करते हुए कहा कि इसके लिए कांग्रेस के नेतृत्व वाली केन्द्र की संप्रग सरकार सीधे जि मेदार है। उन्होंने कहा कि केन्द्र में कांग्रेस व भाजपा जैसी सरकारें रही हैं जिन्होंने गरीबों व समाज के कमजोर व उपेक्षित वर्गों की हमेशा उपेक्षा की। विधानसभा चुनाव परिणामों की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के परिणाम पार्टी की उ मीदों के अनुरूप नहीं रहे।
उन्होंने कहा कि चुनाव के समय कांग्रेस ने मुस्लिम आरक्षण का मुद्दा छेड़ा और भाजपा ने इसका विरोध किया, ऐसे में भाजपा सरकार बनने की आशंका में लगभग 70 प्रतिशत मुसलमानों ने अपना वोट सपा उ मीदवारों के पक्ष में दिया। उन्होंने कहा कि अभी से ही सपा के लोगों की गुण्डागर्दी व माफियागिरी शुरू हो गई है जिसमें कई लोगों की जान जा चुकी है। उन्होंने कहा कि परिणाम को जनादेश बताने वाली सपा के लोगों ने यह मान लिया है कि प्रदेश में फिर से जंगलराज व गुण्डाराज स्थापित करें, यह बहुत चिन्ता का विषय है, ऐसी घटनाएं बसपा के लोगों को लक्ष्य करके की जा रही हैं।












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