सपा के सामने अब जनता के विश्वास पर खरा उतरने की चुनौती

भारतीय जनता पार्टी मेरठ केंट, मेरठ शहर, सरधना और मेरठ दक्षिण से जीत दर्ज कर सीट पर कब्जा किया। दूसरी ओर समाजवादी पार्टी ने हस्तिनापुर, किठौर व सिवालखास में जीत दर्ज की। हस्तिनापुर विधान सभा सीट से सपा प्रत्याशी प्रभुदयाल बाल्मिकी ने पिछले चुनाव में योगेश वर्मा द्वारा मिली पराजय का हिसाब चुकाता किया। प्रभुदयाल बाल्मिकी ने मिली जीत को क्षेत्रवासियों में बैठे डर पर विजय बताया। उन्होंने कहा कि बसपा सरकार ने जो अत्याचार जनता पर किए है, जनता ने उसका हिसाब चुकता करते हुए जिले की सभी सीटों पर सुपडा साफ कराया।
इस मौके पर हारे हुए प्रत्याशियों ने समय को भांपते हुए वहां से निकलना ही बेहतर समझा। लेकिन हस्तिनापुर विधान सभा के पूर्व विधायक योगेश वर्मा चुनाव हारने के बाद भी खुश नजर आए। जब उनसे पूछा गया तो उन्होंने बताया कि यह उनके प्रयास की जीत है। क्योकि उनका मकसद � बसपा प्रत्याशी प्रशांत गौतम को हरवाना था और वह अपने मकसद में पूरी तरह कामयाब रहे। वहीं किठौर विधान सभा क्षेत्र के बसपा प्रत्याशी व पूर्व मंत्री लखीराम नागर भी मतगणना खत्म होने से पूर्व रूझान को अपने पक्ष में न देखकर मतगणना स्थल से निकलते हुए देखे। जब उनसे बसपा शासन के सुपडा साफ होने की बात की गई तो उन्होंने इसे जनता का फैसला बताते हुए स्वीकार किया और उन्होंने आगे भी जनता की सेवा के लिए हमेशा तत्पर रहने की बात कही। केंट विधानसभा क्षेत्र से जीत की हैट्रिक लगाते हुए सत्यप्रकाश अग्रवाल ने जीत का परचम लहराया।
तीसरी बार विधायक चुने जाने पर उन्होंने कहा कि यह जीत जनता के विस्वास की जीत है और वह जनता के विस्वास को बनाए रखने के लिए हमेशा विकास कार्य करेंगे। भाजपा के मेरठ जिले में सबसे वरिष्ठ विधायक का तमगा प्राप्त करने वाले लक्ष्मी कांत वाजपेई ने शहर विधान सभा से जीत दर्ज करते हुए पिछले चुनाव में हुई पराजय का हिसाब चुकता किया।
जब उनसे मिली जीत के बारे में बातचीत की गई तो उन्होंने सर्वसमाज को इसका श्रेय दिया। उन्होंने सभी जाति के लोगों द्वारा मिले समर्थन का धन्यवाद किया। अपने चिर प्रतिद्वविंदी व्यवहार को दर्शाते हुए हाथ में पार्टी का झंडा लेकर बुलंद आवाज में नारा दिया। वंदे मातरम् कमल निशान, मांग रहा है हिन्दुस्तान, जिसे सुनकर मौजूद समर्थकों में जोश की लहर उत्पन्न हुई और कार्यकर्ताओं ने आगे बढते हुए उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
सातों विधानसभाओं में सबसे बडी हार और सबसें बडी जीत का गवाह बनी सरधना विधानसभा सीट से पूर्व विधायक हाजी याकूब को जिले की सभी विधान सभा सीटों में सबसे बडे अंतर से हार का सामना करना पडा। जिन्हें भाजपा प्रत्याशी संगीत सोम ने लगभग साढे 12 हजार मतों से पराजित किया और उन्होंने कद्दावर नेता कहे जाने वाले हाजी याकूब की जीत के मिथन को तोडा।
अपनी जीत से अति उत्साहित दिख रहे संगीत सोम ने पत्रकारों से वार्ता के दौरान कहा कि यह जीत उनके क्षेत्र की जनता की जीत है, जिनके विस्वास के बगैर इसका मिल पाना बहुत मुश्किल था और उन्होंने हाजी याकूब पर कटाक्ष करते हुए कहा कि खुद को आशीके रसूल कहने वालों को यह जनता का जबाव है। जब उनसे सिर पर पकडी ना होने की बात पूछी गई तो उन्होंने मुस्कराते हुए कहा कि गर्मी अधिक होने के कारण उन्होंने पगडी रख दी है। अब जनता द्वारा जो पगडी उन्हें सौंपी गई है, उसकी रक्षा करते हुए वह क्षेत्र में चतुरमुखी विकास का प्रयास करेंगे।
परिसिमन परिक्रिया के बाद एक नई विधान सभा मेरठ दक्षिण बनाई गई, जिस पर पहले विधायक होने का गौरव भाजपा प्रत्याशी रविन्द्र भडाना को प्राप्त हुआ। जिन्होंने बसपा प्रत्याशी राशिद अखलाक को मात देते हुए भारतीय जनता पार्टी क ी झोली में चौथी जीत दर्ज कराई। जीत के बाद सराबोर दिखे रविन्द्र भडाना ने सांसद राजेन्द्र अग्रवाल व पूर्व विधायक अमित अग्रवाल के साथ अपने विजय की खुशी मनाते हुए समर्थकों को धन्यवाद दिया।
साथ ही उन्होंने बढ रहे अपराधिक घटनाओं व बेरोजगारी को दूर करने की बात कही। सिवाल खास से समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी गुलाम मौहम्मद ने साईकिल को रफ्तार दी और जीत की लगी रेस में सबसे आगे निकलते हुए अपने प्रतिद्वंविदियों को बहुत पीछे छोड दिया। जीत के बाद मतगणना स्थल से बाहर आते हुए उनके समर्थकों ने मीडिया कर्मियों से बदसलूकी करते हुए मारपीट की। जिसे उन्होंने गलत करार दिया और मीडियाकर्मियों से माफी मांगकर उनके द्वारा दिए गए सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
बेरोजगार युवाओं पर छाई खुशी
प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर सबसे ज्यादा उन बेरोजगार युवाओं के चेहरों पर खुसी छा गई जिन्हें 2007 से पूर्व मुलायम सिंह सरकार ने बेरोजगारी भत्ता दिया था। गौरतलब है कि मुलायम सिंह यादव ने मायावती सरकार से पहले अपनी सरकार में बेरोजगारों को सहायता देने के लिए बेरोजगारी भत्ता देने के लिए ऐलान किया था। जिसके तहत प्रति माह पांच सौ रूपए का बेरोजगारी भत्ता दिया गया था।
लेकिन जैसे ही प्रदेश में मायावती की सरकार आयी तो उसके द्वारा बेरोजगारी भत्ते को रोक दिया गया। विधान सभा चुनाव में मुलायम सिंह यादव ने प्रचार के दौरान यह घोषणा की थी कि अगर उनकी सरकार प्रदेश में बनती है तो वह बेरोजगारी भत्ते को बढ़ाकर चौगुना कर देंगे और जबकि प्रदेश में अगले दो-तीन दिन में समाजवादी सरकार सत्ता पर काबिज होगी।
इसकी सबसे ज्यादा खुशी उन बेरोजगारों को हुई है जो नौकरी न मिलने के कारण काफी समय से बेरोजगार हैं। साथ ही प्रदेश में छात्रसंघ के चुनाव पर लगी रोक के भी हटने के आसार बनते नजर आ रहे हैं क्योंकि मुलायम सिंह सरकार ने अपनी घोषणा पत्र में प्रदेश के विश्वविद्यालयों में छात्रसंघ चुनाव कराने की घोषणा की थी












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