अखिलेश यादव का क्रांतिरथ बना विजयी रथ

Akhilesh Yadav
लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी अगर सत्‍ता पर काबिज होने जा रही है तो इसका काफी हद तक श्रेय पार्टी युवराज अखिलेश यादव को जाता है। जिन्‍होंने आम आदमी की आवाज पहचान कर उनको वोट में तब्‍दील किया। सपा की इस जीत ने अखिलेश को स्‍थापित राजनेता साबित कर दिया। उन्‍होंने अपनी दम पर बहुमत के लिए जरूरी 202 सीटों का जादुई आंकड़ा पार कर लिया।

इस बार के चुनावों में शुरुआत से ही अखिलेश यादव ने मोर्चा संभाला था। जब 2007 में हुए विधानसभा चुनावों के बाद 2009 में लोकसभा चुनावों में भी पार्टी का प्रदर्शन खराब रहा तो उन्‍होंने पार्टी को नए सिरे से खड़ा करने का जिम्‍मा सौंपा। जिसके लिए मुलायम सिंह यादव ने भी उन्‍हें पार्टी की कमान सौंप दी। कमान संभालते ही उन्‍होंने अमर सिंह को बाहर का रास्‍ता दिखाया।

जिसके बाद उन्‍होंने गुंडाराज के नाम से बदनाम अपनी पार्टी से गुंडों की छटनी करनी शुरू कर दी। बाहुबली डीपी यादव की लगभग समाजवादी पार्टी में वापसी हो ही चुकी थी। मगर अखिलेश यादव ने उन्‍हें पार्टी में लेने से इंकार कर पार्टी में अपनी भूमिका को साबित कर दिया।

चुनावों से कुछ महीने पहले वे जनता के बीच क्रांतिरथ निकले। पूरे राज्‍य में उनके क्रांतिरथ ने ऐसी धूम मचाई कि यह क्रांतिरथ विजयी रथ में तब्‍दील हो गया। जिससे अखिलेश यादव न सिर्फ राज्‍य बल्कि देश की राजनीति के सबसे होनहार सितारे बनकर उभरे।

मुलायम सिंह यादव खुद मुख्‍यमंत्री की गद्दी पर विराजमान न होकर अखिलेश यादव को सीट पर बैठा सकते हैं। उत्‍तर प्रदेश की जनता भी यही चाहती है कि उत्‍तर प्रदेश के अगले मुख्‍यमंत्री अखिलेश यादव ही बनें।

यूपी में हुए चुनाव के नतीजे अपने पक्ष में कर अखिलेश यादव ने राहुल गांधी पर अपनी श्रेष्‍ठता भी साबित कर दी। इन चुनावों में अखिलेश यादव जहां समाजवादी पार्टी के युवराज बनकर उभरे हैं जबकि राहुल गांधी कांग्रेस के यमराज बन गए हैं।

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