बिक्रम सिंह ही होंगे नए सेनाध्यक्ष

ईस्टर्न आर्मी कमांड के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल बिक्रम सिंह 13 लाख फौजियों नेतृत्व करेंगे। जम्मू-कश्मीर में कथित फर्जी मुठभेड़ के मामले में चल रहे मुकदमे की वजह से लेफ्टिनेंट जनरल बिक्रम सिंह की नियुक्ति कुछ समय के लिए अनिश्चितता के दौर से भी गुजर रही थी। सामान्यत: वरिष्ठता को प्रमुखता देती आ रही सरकार ने बिक्रम सिंह के नाम पर ही अंतिम सहमति बनाई।
जनरल वीके सिंह की रिटायरमेंट के बाद बिक्रम सिंह ही सबसे वरिष्ठ सैन्य अधिकारी हैं। 59 वर्षीय बिक्रम सिंह दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी फौज की कमान 31 मई 2012 से संभालेंगे और उनका कार्यकाल अगस्त 2014 तक होगा। यानी सिंह दो साल से कुछ ज्यादा अवधि के लिए सेना प्रमुख के पद पर रहेंगे। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता सितांशु कर ने नई नियुक्ति की घोषणा की। सामान्य प्रक्रिया तो यही है कि नए सेनाध्यक्ष की घोषणा मौजूदा प्रमुख के रिटायरमेंट से साठ दिन पहले की जाती है। लेकिन इस मामले में लगभग 90 दिनों पहले ही इसका ऐलान कर दिया गया है।
माना जा रहा है कि जनरल सिंह के उत्तराधिकार को लेकर हो रही अटकलबाजियों और किसी भी विवाद के पनपने से रोकने के मकसद से भी सरकार ने ऐसा किया है। मौजूदा आर्मी कमांडरों में वरिष्ठतम बिक्रम सिंह की नियुक्ति जनरल वी के सिंह के उम्र विवाद में उलझी हुई थी। सुप्रीम कोर्ट में अगर जनरल वीके सिंह अपनी जंग जीत जाते तो सरकार की स्वाभाविक पसंद माने जा रहे बिक्रम सिंह को यह कुर्सी मिलनी असंभव थी। फिर सेना की कमान अगले साल केटी परनाइक को थमाई जाती।
सिख लाइट इन्फैंट्री से 31 मार्च 1972 से अपने सैन्य कैरियर की शुरुआत करने वाले ले. जनरल बिक्रम सिंह ने अपनी चालीस साल लंबी सेवा के दौरान कई अहम पदों पर काम किया है। बिक्रम सिंह ने उग्रवाद से जूझ रहे श्रीनगर में भी अपने फर्ज को बखूबी अंजाम दिया है। यूएन के पीस कीपिंग मिशन में डिप्टी फोर्स कमांडर की हैसियत से उन्होंने कांगो में काम किया है। तो सिंह निकारागुआ और अल सल्वाडोर में यूएन ऑब्जर्वर की हैसियत से तैनात रहे। बिक्रम सिंह ने डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज, आर्मी वॉर कॉलेज और पेनसिलवेनिया में यूएस आर्मी वॉर कॉलेज से प्रशिक्षण हासिल किया है।












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