चिदंबरम के सपने पर फिर कुठाराघात

गौरतलब है कि गृहमंत्री पी. चिदंबरम रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) को औऱ अधिकार देना चाहते हैं जिससे रेलवे में बढ़ रही आपराधिक घटनाओं पर लगाम लग सके। पर राष्ट्रीय आतंकरोधी केंद्र (एनसीटीसी) की तरह ही इसका भी राज्यों ने विरोध शुरू कर दिया है। पहले उत्तर प्रदेश फिर तमिलनाडु और अब ओडिशा। मालूम हो कि आरपीएफ कानून में संशोधन की मांग खुद राज्यों के पुलिस महानिदेशकों की बैठक में उठी थी। बैठक में ट्रेनों और रेलवे परिसरों में बढ़ते अपराध को रोकने के लिए आरपीएफ के सब इंस्पेक्टर को थाना अधिकारी का दर्जा देते हुए एफआईआर दर्ज करने और आरोपी को गिरफ्तार करने का अधिकार दिए जाने पर सहमति बनी थी।
इसके बाद गृह मंत्रालय ने रेल मंत्रालय को कानून में संशोधन का मसौदा तैयार करने को कहा था। अब तक संशोधन का मसौदा तैयार है और बजट सत्र में संसद में पेश करने की तैयारी है, राज्यों की ओर से विरोध शुरू हो गया है। आरपीएफ कानून में संशोधन के बढ़ते विरोध के बाद इसे संसद से मंजूरी मिलने की संभावना धूमिल हो गई है। दरअसल राज्य सभा में सरकार बहुमत में नहीं है और उसके लिए इसे पास कराना संभव नहीं हो सकेगा। नवीन पटनायक ने पत्र में साफ कर दिया है कि कानून-व्यवस्था राज्य के अधिकार क्षेत्र में आता है और इसे आरपीएफ को नहीं सौंपा जा सकता है।












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