हिसार में दिन-दिहाड़े छात्र पर गोलियां दागी

पुलिस की प्रारंभिक जांच में हमलावर पनिहार चक गांव निवासी कल्याण और सीसवाल ग्राम वासी राम कुमार के नाम सामने आए हैं। फिलहाल दोनों आरोपी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। पुलिस को वारदात में प्रयोग की गई बाइक का नंबर पता चला है, जिसकी जांच अभी की जा रही है। बाइक पर लगी नंबर प्लेट पर हिसार का नंबर कोड छपा हुआ बताया गया है।
वारदात के वक्त मौके पर उपस्थित लोगों ने पुलिस अधिकारियों को बताया कि सुबह करीब 10 बजे चिकनवास गांव के बस स्टैंड पर रोडवेज की एक बस आकर रुकी और उसमें से शिक्षण संस्थान के छात्र उतरे और संस्थान की ओर चल दिए। एक छात्र अन्य छात्रों से अलग चल रहा था। बस के चलते सामने से बाइक पर सवार दो युवक आए। उस युवक के सामने बाइक को धीमा किया और उस पर ताबड़तोड़ फायर कर दी।
पहले तो उन्हें कुछ समझ नहीं आया, मगर क्षण भर में ही वह युवक खून में लथपथ नीचे गिर गया। जब क्षेत्रवासी और संस्थान की ओर जा रहे कुछ छात्र घटनास्थल की ओर दौड़े तो आरोपियों ने उनकी तरफ बंदूक तान दी और फायर भी किए। ये 2 गोलियां किसी को नहीं लगी, मगर अपने को बचाते हुए हमलावर बाइक तेज गति से लेकर चले गए। घायल छात्र के नजदीक पहुंचे तो वो तड़प रहा था। उसके सीने, पेट और बाजू से खून बह रहा था। उसने तड़पते हुए बचाने की बात बोली और वह बेसुध हो गया। जब तक उसे अस्पताल ले जाने के लिए वाहन का प्रबंध करके उसे अस्पताल ले जाते, वह दम तोड़ चुका था। वारदात की जानकारी मिलते ही अग्रोहा थाना प्रभारी, पुलिस उप-अधीक्षक सहित पुलिस की टीम मौके पर पहुंच गई।
पुलिस जांच में छात्र की हत्या के पीछे पुलिस रंजिश बताई जा रही है और विद्यार्थियों ने बताया कि 4,5 दिन पहले छात्र प्रदीप और दोनों आरोपी छात्रों में कहा सुनी भी हुई थी। उन्होंने पुलिस को यह भी बताया कि करीब दो महीने पहले आरोपी छात्रों ने प्रदीप के पिता के नाम का मजाक बनाया था, जिसको लेकर दोनों में झगड़ा हुआ था और बाद में प्रदीप के पिता रामपाल और दूसरे छात्रों के परिजनों में राजीनामा हो गया था। बताया जा रहा है कि प्रदीप की हत्या करने वाले युवकों ने उसे राजीनामा होने के बाद भी सबक सिखाने को कहा था।
इकलौता बेटा और भाई था प्रदीप
प्रदीप अपनी मां संतोष और पिता रामपाल का इकलौटा बेटा था। उसकी एक बहन योगिता है जो राजकीय कन्या महाविद्यालय में स्नातकोत्तर कर रही है। प्रदीप के पिता मौके पर बस एक ही बात कह रहे थे कि तुझे पैसा उधार लेकर इसलिए पढ़ा रहा था कि मेरे बुढ़ापे का सहारा बनेगा, मगर अब मेरा सहारा कौन बनेगा, प्रदीप? आ जा बेटा, ना जा।












Click it and Unblock the Notifications