हाईकोर्ट के पूर्व जस्टिस का किसानों को समर्थन

कालसे पाटिल ने गोरखपुर परमाणु संयंत्र विरोधी किसानों का समर्थन करने यहां आए थे। उन्होंने कहा कि विकसित देशों में लगे हुए परमाणु संयंत्र किसी भी सूरत में सुरक्षित नहीं है। उन्होंने कहा कि 1973 के बाद विकसित देशों में आज तक कोई भी परमाणु संयंत्र नहीं लगाया गया है। श्री पाटिल ने कहा कि देश की कुल आबादी के 44 प्रतिशत लोगों ने आज तक बिजली की शक्ल नहीं देखी है और 33 प्रतिशत लोग एक साल में 0 से 50 यूनिट तक बिजली का प्रयोग करते हैं।
जिससे देश की कुल आबादी के 77 प्रतिशत लोग 0 से 50 यूनिट तक बिजली खर्च करते हैं, इसलिए देश में परमाणु संयंत्र की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार विकास के नाम पर किसानों की उपजाऊ जमीन को उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए अधिग्रहित कर रही है। उन्होंने कहा कि विश्व के विकसित देश जर्मनी, स्विटजरलैण्ड, जापान, इटली सभी परमाणु रिएक्टरों को रिजेक्ट कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की जरूरत है। जापान जैसे देश में वर्ष 2020 तक 10 करोड़ मैगावाट बिजली का उत्पादन होगा। उन्होंने कहा कि सौर ऊर्जा ही सबसे सस्ती ऊर्जा है।
सौर ऊर्जा के उत्पादन के विकल्प बहुत ही सस्ते हैं और इनसे ना तो मानव स्वास्थ्य को कोई हानि होती है और ना ही पर्यावरण को। इस अवसर पर हिमालय नीति अभियान के सदस्य गुमनाम सिंह, नर्मदा बचाओ आंदोलन के सदस्य प्रो. विष्णु श्रीवास्तव, आजादी बचाओ आंदोलन के सदस्य डॉ. राजेन्द्र शर्मा, जसबीर आर्य, परमाणु विरोधी मोर्चा हिसार के प्रदीप चौधरी, महाबीर शर्मा, का. कृष्ण स्वरूप गोरखपुरिया, हंसराज सिवाच, शैलेन्द्र कुमार हिसार, जितेन्द्र कुमार, सुभाष पूनिया फतेहाबाद सहित अनेक किसान नेता उपस्थित थे।












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