आईएसआई एजेंट कामरान टहलते हुए घुसा था भारत में

कामरान ने खुलासा किया है कि वह पाकिस्तानी पासपोर्ट से ढाका (बांग्लादेश) गया और वहीं से काठमांडू चला गया। कांठमाडू से बस से वह भारत-नेपाल बॉर्डर काकर बेतिया आया। यहां रिक्शे में बैठकर भारत में आ गया। कामरान ने बताया कि भारत सीमा में घुसने के दौरान न तो उसे किसी ने रोका और न ही उससे कोई रोक-टोक हुई। इससे पहले भी कई जासूस इस बॉर्डर से भारत में प्रवेश कर चुके हैं।
आईबी, रॉ और मिलिट्री आदि सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारियों ने भी अपराध शाखा के आरकेपुरम स्थित कार्यालय में कामरान से पूछताछ की। कामरान ने बताया कि वह कोलकाता में एक सेना अधिकारी का ड्राइवर बन गया था। यहीं से धीरे-धीरे उसकी सेना में घुसपैठ हुई थी। वह भारत की कमजोर सुरक्षा व्यवस्था पर खुद भी हैरान हैं। उसने बताया कि पैन कार्ड समेत कोई भी दस्तावेज बनवाने में उसे कोई परेशानी नहीं हुई।
पुलिस के अनुसार पाक खुफिया एजेंसी ने कामरान को वापस बुलाया था। दिल्ली में खुफिया दस्तावेज लेने के साथ-साथ वह पाक का वीजा भी लगवाना था। आईएसआई ने उसे बताया था कि पाक से उसे करीब आधा दर्जन पाकिस्तानी जासूसों को भारत में प्रवेश कराकर उनके भारतीय पहचान पत्र बनवाना है और कोलकाता स्थित घर में शरण देनी है। ये पाकिस्तानी भी इस बार्डर से भारत में प्रवेश करते।
माना जा रहा है कि इनसे सेना के अलावा न्यूक्लियर ठिकानों की भी जासूसी करवाई जाती। दूसरी तरफ कामरान ने सेना के साथ-साथ भारतीय एयरफोर्स की भी जासूसी करना शुरू कर दिया था। इसके लिए इसने एक एयरफोर्स कर्मचारी से दोस्ती गांठ ली थी। कामरान यह नहीं बता रहा है कि आधा दर्जन पाकिस्तानी जासूसी के लिए वाले थे या फिर दहशतगर्द थे। कामरान ने बताया कि मुल्तान में एक अधिकारी एक व्यक्ति को ट्रेनिंग देता था। यहां ट्रेनिंग ले रहे लोगों को एक दूसरे से मिलने नहीं दिया जाता था।












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